भारतीय कंपनी सहित आठ संस्थाओं पर बैन, अमरीका ने सूडान गृहयुद्ध को बढ़ावा देने के आरोप में की कार्रवाई

अमरीका ने सूडान में चल रहे गृहयुद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क से संबंध रखने का आरोप में आठ लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं जिनमें एक भारतीय कंपनी भी शामिल है। ये नेटवर्क सूडानी सशस्त्र बलों (एसएएफ ) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) दोनों के लिए हथियार खरीदने, लोगों की भर्ती करने और लॉजिस्टिकल सहयोग देने का काम करते हैं।अमरीका के वित्त विभाग विभाग के अनुसार, ये नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाकों की सप्लाई में शामिल हैं, जिससे दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक को बढ़ावा मिल रहा है। अमरीका के विदेश विभाग और वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) द्वारा घोषित इस कार्रवाई का मकसद उन नेटवर्क को रोकना है, जिन्हें अधिकारियों ने ‘सूडान के युद्ध को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क’ बताया है। ये नेटवर्क एसएएफ और आरएएफ दोनों को हथियार, विस्फोटक और लोगों की आपूर्ति करते हैं। अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि सूडान में संघर्ष से फायदा उठाने वाले नेटवर्क उस मानवीय युद्धविराम की संभावनाओं को खतरे में डालते हैं, जिसकी सूडान के लोगों को बहुत ज्यादा •ारूरत है।
अधिकारियों ने बताया कि ये प्रतिबंध कार्यकारी आदेश 14098 के तहत लगाए गए हैं। यह आदेश उन लोगों को निशाना बनाता है, जो सूडान में अस्थिरता फैला रहे हैं और लोकतांत्रिक बदलाव की प्रक्रिया को कमजोर कर रहे हैं। ये प्रतिबंध दोनों पक्षों पर युद्धविराम के लिए सहमत होने का दबाव बनाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा हैं। जिन लोगों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें वे शामिल हैं जो विस्फोटक और सैन्य उपकरण आपूर्ति करने के काम से जुड़े हैं। ओएफएसी ने बताया कि सूडान की‘टारगेट मल्टी एक्टिविटीज कंपनी लिमिटेड’ (टीएमएसी) (जो रक्षा उद्योग प्रणाली (डीआईएस) के नियंत्रण में है) ने भारत की ‘एसबीएल एनर्जी लिमिटेड’ से विस्फोटक मंगवाए थे। वित्त विभाग ने कहा कि भारतीय नागरिक आलोक चौधरी की अगवाई वाली एसबीएल ने सूडान से जुड़ी संस्थाओं को ‘2024 से अब तक विस्फोटक और उससे जुड़ी सामग्री की 200 से ज्यादा खेप’ की आपूर्ति की हैं।






