चंडीगढ़

नशा तस्करी को जमानत नहीं ; छोटी मात्रा नहीं, बड़े नेटवर्क का हिस्सा-अदालत ने कहा

चंडीगढ़, नशा तस्करी के एक मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मात्रा भले कम थी लेकिन तस्कर बड़े नेक्सस का हिस्सा, इसलिए आरोपी को जमानत नहीं मिल सकती। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि पूरा ड्रग्स नेटवर्क है। मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में हेराइन बरामद हुई और याचिकाकर्ता आरोपी साहिल पकड़े गए आरोपी को ड्रग्स सप्लाई करने वाल सप्लायर की भूमिका में गिरफ्तार हुआ है। मामले में याचिकाकर्ता आरोपी के वकील की ओर से दलील में कहा गया कि बरामदगी कम मात्रा की है, उसे झूठा फंसाया गया है और मामले में कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को नहीं मानते हुए जमात याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि मामला गंभीर है और बड़ी मात्रा में नशा मिला है, इसलिए अभी आरोपी को छोड़ा नहीं जा सकता।

इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि इस समय आरोपी को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए फिलहाल उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती।

दायर मामले के तहत 27 फरवरी 2026 को पुलिस टीम सेक्टर-43 आईएसबीटी के पीछे गश्त कर रही थी। इसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि अमृतसर से एक तस्कर बड़ी मात्रा में हेरोइन लेकर चंडीगढ़ पहुंचने वाला है। पुलिस ने नाका लगाकर एक कार को रोका, जिसमें सवार आरोपी आफताब के कब्जे से 1.065 किलो हेरोइन बरामद हुई। यह मात्रा व्यावसायिक श्रेणी (कमर्शियल क्वांटिटी) में आती है। जांच के दौरान आरोपी आफताब के खुलासे पर साहिल उर्फ प्रिंस समेत अन्य आरोपियों सतपाल सिंह और अजय उर्फ संजू को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी साहिल कुमार के खुलासे के बाद लुधियाना के जवाहर नगर कैंप स्थित बाल्मीकि पार्क में छापेमारी की गई, जहां से 18.97 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। यह बरामदगी खुले स्थान से हुई, जिसे आरोपी ने खुद बताकर दिखाया था। वहीं सह-आरोपी अजय उर्फ संजू के घर पर भी पुलिस ने दबिश दी, जहां से एक इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नशा तौलने के उपकरण और छोटे-छोटे खाली पाउच बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक ये सामान नशीले पदार्थ को तौलकर पैक करने में इस्तेमाल किया जाता था, जिससे ड्रग्स सप्लाई का नेटवर्क चलाया जा रहा था। अदालत ने यह भी देखा कि इसी मामले में अन्य आरोपी अजय और सतपाल की जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं, इसलिए समान आधार पर साहिल को राहत देना उचित नहीं है।

 

 

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