खिलौनों की तरह बहती दिखी बसें, चुटकी में पानी में समाया टर्मिनल, जानिए अचानक बाढ़ आने की वजह

नेपाल-चीन बॉर्डर पर पहाड़ी सुनामी की चपेट में आए ग्यिरॉन्ग पोर्ट के बस टर्मिनल का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है। इंटरनेट पर सैलाब में ध्वस्त होते टर्मिनल का वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें जान बचाने के लिए भागते लोग चींटी की तरह दिखाई दे रहे हैं। कंक्रीट की मजबूत टर्मिनल कुछ सेकंड भी दानवी लहर को नहीं झेल सकी और पल भर में ध्वस्त हो गई। इस दौरान वहां खड़ी बसें सैलाब में ऐसी बहती दिखाई दी, जैसे प्लास्टिक के खिलौने बह रहे हो। सैलाब आने से पहले जान बचाने के लिए जो लोग वहां से निकल रहे थे। शायद वे भी इस तबाही की चपेट में आ गए, क्योंकि, कुछ सेकंड के अंदर सबकुछ तबाह हो गया और टर्मिनल का वो हिस्सा नदी के दायरे में आ गया। ऐसे में वहां मौजूद लोगों का क्या हाल हुआ होगा। इस बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है।
रसुवा में नौ बैंकों की शाखाएं बहीं, 26 कर्मचारी लापता
रसुवा में आई भीषण बाढ़ में नौ बैंकों की शाखाएं बह गईं। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक, इनमें काम करने वाले 26 कर्मचारियों से अभी तक संपर्क नहीं हो पाया है। टेलीफोन सेवाएं ठप होने और बिजली नहीं होने के कारण राहत एवं बचाव टीमों को भी संपर्क करने में परेशानी हो रही है। वहीं चीन ने तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर मलबे के बहाव के बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। इसके लिए 574 बचावकर्मियों को प्रभावित इलाके में भेजा गया है।
अचानक बाढ़ आने की वजह
भूकंप से टूटा ल्हेन्दे नदी का अवरोध
वैज्ञानिक इस हिमस्खलन के पीछे उसी समय क्षेत्र में आए भूकंप को भी एक संभावित ट्रिगर मान रहे हैं। अमरीकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह लगभग 8:37 बजे गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर तिब्बती क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका असर यह हुआ कि ल्हेन्दे नदी अचानक हिमस्खलन से अवरुद्ध हो गई। यही नदी तिब्बत में आगे बढक़र नेपाल में त्रिशूली नदी में मिल जाती है और भोटेकोशी कहलाती है। राष्ट्रीय विपदा जोखिम न्यूनीकरण और व्यवस्थापन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) को भी चीनी सूत्रों से यही प्रारंभिक जानकारी मिली है।
हिमताल विस्फोट की आशंका
इस क्षेत्र में कई बड़े हिमताल मौजूद हैं, इसलिए वैज्ञानिक इस बात की भी गहन जांच कर रहे हैं कि क्या हिमस्खलन के साथ-साथ कोई हिमताल भी फटा है। जल और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) का मानना है कि नेपाल या तिब्बत के किसी क्षेत्र में हिमताल विस्फोट की पूरी संभावना है। गौरतलब है कि पिछले साल (8 जुलाई, 2025) भी इसी ल्हेन्दे नदी में ऐसी ही अचानक बाढ़ आई थी, जिसका मुख्य कारण उपग्रह के चित्रों के विश्लेषण से हिमताल विस्फोट ही पाया गया था।
कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य मानसून बाढ़ नहीं थी। जल और मौसम विज्ञान विभाग के विशेष अपडेट के मुताबिक, मंगलवार और बुधवार को इस पूरे क्षेत्र में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी। बारिश न होने के बावजूद अचानक पानी का इतना बड़ा रेला आना इस बात की पुष्टि करता है कि यह पानी किसी प्राकृतिक अवरोध के अचानक टूटने से ही आया है।
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