
चंडीगढ़: चंडीगढ़ जिला अदालत में महिला वकील से छेड़छाड़ और जातिसूचक टिप्पणी के मामले में वकील रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जॉली को बड़ा झटका लगा है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय चंडीगढ़ ने आरोपी को राहत नहीं दी और उसे केस से बाहर करने की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ शुरुआती तौर पर पर्याप्त सबूत हैं, इसलिए अब उस पर मुकदमा चलेगा।
कोर्ट ने पाया कि वकील के खिलाफ बीएनएस की धारा 74, 75(2), 115(2) और 351(2) के साथ-साथ एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r), 3(1)(w) और 3(1)(s) के तहत मामला बनता है।
जानिए पूरा मामला क्या था
शिकायत के अनुसार 7 अक्टूबर 2024 को जिला अदालत सेक्टर-43 में वकील रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जॉली ने पहले एक व्यक्ति को गालियां दीं। जब महिला वकील ने बीच-बचाव किया तो आरोपी ने उसे जातिसूचक शब्द कहे। आरोप है कि आरोपी ने महिला के बाल पकड़े, थप्पड़ मारे और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने वकील रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जॉली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया।
आरोपी ने क्या दी दलील
वकील रविंदर सिंह बस्सी उर्फ जॉली ने कोर्ट में कहा कि उसके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दलील दी कि मामले में कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया है और शिकायतकर्ता की मेडिकल रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। इसके अलावा, जांच अधिकारी ने कुछ अहम गवाहों के बयान जानबूझकर कोर्ट में पेश नहीं किए। वकील ने यह भी कहा कि यह केस पहले दर्ज एफआईआर का बदला है। इन सभी आधारों पर आरोपी ने खुद को बरी करने की मांग की।
सरकारी पक्ष की दलील
सरकारी वकील और शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि इस समय सिर्फ यह देखा जाता है कि पहली नजर में मामला बनता है या नहीं। उन्होंने कहा कि पीड़िता ने स्पष्ट आरोप लगाए हैं और इस समय उसकी बात पर शक करने का कोई कारण नहीं है।
कोर्ट बोला अपराध बनता है
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चार्ज तय करते समय केवल शुरुआती सबूत देखे जाते हैं। इस चरण पर आरोपी की सफाई या उसके बचाव पर विचार नहीं किया जाता। कोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता के बयान से पहली नजर में अपराध बनता है। साथ ही, कोर्ट ने माना कि आरोपी ने सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक टिप्पणी की और महिला के साथ गलत व्यवहार किया, जो गंभीर अपराध है।






