चंडीगढ़ बना देश का पहला ज़ीरो लैंडफिल मॉडल शहर, 2.40 लाख मीट्रिक टन कचरा साफ़ कर रचा इतिहास!
चंडीगढ़ | 22 जुलाई 2025 : स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत चंडीगढ़ ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। शहर की पहचान अब केवल उसकी सुंदरता या नियोजित ढांचे से नहीं, बल्कि उसके ज़ीरो लैंडफिल मॉडल से भी होगी। दादूमाजरा डंपसाइट से करीब 2.40 लाख मीट्रिक टन विरासती कचरा हटाकर, चंडीगढ़ जल्द ही भारत का पहला पूर्ण लैंडफिल-मुक्त शहर बनने जा रहा है।
नगर निगम की इस अभूतपूर्व पहल ने कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई क्रांति को जन्म दिया है। यह कदम सिर्फ सफाई का नहीं, बल्कि सस्टेनेबल और स्मार्ट शहर की ओर तेज़ी से बढ़ते भारत का प्रतीक बन चुका है।
मौसम की मार, फिर भी नहीं रुका मिशन
इस परियोजना की शुरुआत 25 जनवरी 2025 को हुई थी, और इसके दौरान 45 से अधिक बार बारिश हुई — जिनमें से हर बार दो दिनों तक काम बंद रहा। लेकिन नगर निगम, मशीनरी और मजदूरों की लगन के सामने मौसम भी हार गया। परियोजना की गति बनाए रखने के लिए 15 से 20 गुना जनशक्ति और मशीनरी लगाई गई।
कैसे किया गया इतना बड़ा कचरा प्रबंधन?
-
दो शिफ्टों में लगातार काम, ताकि समय पर लक्ष्य पूरा हो सके।
-
बायोरेमेडिएशन तकनीक से कचरे को पुनः उपयोग योग्य रूप में बदला गया।
-
लीचेट प्रबंधन, आग नियंत्रण, रेडियोलॉजिकल टेस्टिंग जैसे संवेदनशील पहलुओं को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
चंडीगढ़ के लिए यह क्यों है ऐतिहासिक?
नगर आयुक्त आईएएस अमित कुमार ने कहा,
“यह सिर्फ एक कचरा प्रबंधन परियोजना नहीं, बल्कि यह चंडीगढ़ की स्थिरता और स्मार्ट विकास के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”
यह पहल भारत सरकार के स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल के तहत कड़े पर्यावरणीय मानकों को पूरा करते हुए की गई, जिससे चंडीगढ़ देश के सबसे स्वच्छ, टिकाऊ और बुद्धिमान शहरी क्षेत्रों में से एक बन गया है।
क्या होगा इसका असर?
-
शहर में कचरे के ढेर गायब हो गए हैं।
-
लैंडफिल साइट की ज़रूरत खत्म हो चुकी है।
-
स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को राहत मिलेगी।
-
अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल तैयार हुआ है।






