हरियाणा विधानसभा में कानून-व्यवस्था पर जबरदस्त हंगामा, कांग्रेस का वॉकआउट – CM सैनी बोले: “हुड्डा राज में थाने में हुआ था रेप”

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भारी हंगामे और तीखी बहस के नाम रहा। कांग्रेस ने प्रदेश में बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार पर जोरदार हमला बोला, तो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए एक गंभीर अपराध का हवाला देते हुए विपक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया।
CM सैनी का बड़ा आरोप:
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 2008 का एक मामला उठाते हुए कहा, “10 अप्रैल 2008 को रोहतक के थाने में 5 पुलिसकर्मियों ने एक महिला से बलात्कार किया था। उस वक्त हुड्डा मुख्यमंत्री थे। 40 दिन तक पीड़िता न्याय के लिए भटकती रही और अंत में उसने आत्महत्या कर ली। बाद में सीबीआई ने न्याय दिलाया।”
सीएम हरियाणा के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीखी आपत्ति जताई, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सैनी ने तंज कसते हुए कहा, “सच सुन नहीं सकते और न ही बोल सकते हैं, इसलिए सदन छोड़ने की आदत है।”
कांग्रेस का आरोप: हर दिन 3 हत्या, 5 रेप
कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि हरियाणा महिलाओं और बच्चियों के लिए सबसे असुरक्षित राज्य बन चुका है। उन्होंने हिमानी नरवाल हत्याकांड और सफीदों गोलीकांड जैसे मामलों का ज़िक्र करते हुए सरकार पर अपराध रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया।
पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने कहा, “2014 से पहले अपराध दर 10 से कम थी, अब हालत यह है कि अपराधी खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। हरियाणा आज देश का सबसे असुरक्षित प्रदेश बन चुका है।”
अरोड़ा का आरोप: “हरियाणा, यूपी से भी बदतर”
कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 11 अपहरण और 3 से 4 हत्याएं हो रही हैं। “हरियाणा सरकार त्योहारों और जयंतियों में व्यस्त है, पुलिस को अपराध रोकने का समय नहीं,” उन्होंने कहा।
भाजपा का पलटवार: “कांग्रेस के आंकड़े भ्रामक”
हरियाणा शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमारी सरकार ने अपराधियों पर सख्ती दिखाई है। कांग्रेस शासन में सिर्फ 37 एनकाउंटर हुए थे, हमने 150 से ज्यादा किए हैं।” उन्होंने दावा किया कि अपराध दर जनसंख्या अनुपात के अनुसार पहले से कम है।
सदन में नारेबाजी और टकराव का माहौल
कांग्रेस विधायकों ने ‘सीएम सदन में आओ’ और ‘अपराधियों पर लगाम कसो’ जैसे नारे लगाए, तो भाजपा विधायकों ने भी इसका जोरदार विरोध किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि स्पीकर को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा।






