लुधियाना में नायब सिंह सैनी के दौरे पर सियासी घमासान: ‘आप’ ने काले झंडों से जताया विरोध

लुधियाना, 22 फरवरी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) के लुधियाना दौरे के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। ‘पूर्वांचल सम्मान रैली’ में शामिल होने पहुंचे सैनी का आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाकर विरोध किया। धुरी लाइन रेलवे ओवरब्रिज के पास प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए भाजपा पर पंजाब के साथ भेदभाव का आरोप लगाया।
फंड और नीतियों को लेकर आरोप
आत्म नगर से ‘आप’ विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पंजाब के विकास से जुड़े वित्तीय संसाधनों को बाधित कर रही है। उनका आरोप था कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए मिलने वाले धन में कटौती कर पंजाब को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। ‘आप’ नेताओं ने दावा किया कि भाजपा एक तरफ राज्य के अधिकारों को सीमित करती है और दूसरी तरफ जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास करती है।
कानून-व्यवस्था पर पलटवार
पार्टी के लोकसभा इंचार्ज शरणपाल सिंह मकड़ ने कहा कि भाजपा पंजाब की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के हालात पर टिप्पणी करने से पहले अपने प्रदेश की स्थिति का आकलन जरूरी है। जिला प्रधान जतिंदर खंगूड़ा ने भी मीडिया से बातचीत में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अपराध दर के मामले में तुलना करते समय निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हरियाणा में बीते वर्षों में हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, इसलिए दूसरों को नसीहत देना उचित नहीं।
रैली और राजनीतिक संदेश
भाजपा द्वारा आयोजित ‘पूर्वांचल सम्मान रैली’ में सैनी के साथ पंजाब भाजपा के कई नेता भी मौजूद रहे। यह कार्यक्रम पूर्वांचल समुदाय के सम्मान और संगठनात्मक मजबूती के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। हालांकि, रैली स्थल के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक संदेश को अलग दिशा दे दी। ‘आप’ का कहना है कि भाजपा किसानों और व्यापारियों के हितों की अनदेखी करती रही है, जबकि भाजपा इन आरोपों को सिरे से खारिज करती रही है।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी तल्खी
सैनी के दौरे और ‘आप’ के विरोध प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि पंजाब में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तीखी हो सकती है। आगामी चुनावी समीकरणों के मद्देनजर दोनों दल एक-दूसरे पर हमलावर रुख अपना रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के घटनाक्रम राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं। वहीं, आम जनता विकास, कानून-व्यवस्था और आर्थिक मुद्दों पर ठोस समाधान की अपेक्षा कर रही है।





