अकाल तख्त को बेअदबी कानून नामंजूर

अमृतसर
अकाल तख्त को नया बेअदबी कानून मंजूर नहीं है। इस संबंध में विधानसभा स्पीकर को आठ मई को तलब किया है। स्पीकर से पूछा जाएगा कि पंथ की इजाजत के बिना कानून कैसे बनाया गया। अमृतसर में रविवार को श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण पंथक बैठक में यह फैसला लिया गया। इस कानून में गुरुद्वारा प्रबंधन और ग्रंथी सिंहों की जिम्मेदारी को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह विषय सीधे पंथ से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसके निर्णय पंथक स्तर पर ही लिए जाने चाहिए, न कि केवल सरकार द्वारा। यह बैठक भाई गुरदास हॉल में आयोजित की गई, जिसमें सिख संगठनों, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों ने भाग लिया।
जत्थेदार स्वयं बैठक स्थल पर पहुंचे और विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। मीडिया से बातचीत करते हुए जत्थेदार कुलदीप सिंह गडग़ज ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब केवल सिख समुदाय के ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के गुरु हैं। उन्होंने कहा कि हर सिख का यह कर्तव्य है कि वह गुरु साहिब के प्रति सम्मान को अपने हृदय में धारण करे और उनकी शिक्षाओं को जीवन में अपनाए। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु बाणी से जुडऩा और उसे समझना आत्मिक शक्ति प्राप्त करने का सबसे महत्त्वपूर्ण माध्यम है।






