55 लाख गंवाए ऑप्शन ट्रेडिंग में : कितना रिस्की है Options Trading? जानें पूरी सच्चाई
शेयर मार्केट में तेजी से पैसा कमाने का सपना देख रहे एक युवक का परिवार आज भूखमरी के हालात झेल रहा है। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के रहने वाले इस युवक ने ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) में 55 लाख रुपये गंवा दिए। शुरुआत छोटे निवेश से हुई, लेकिन फिर मुनाफे के लालच में उसने बैंक और रिश्तेदारों से लगभग 45 लाख रुपये का कर्ज ले लिया। कुछ महीनों में ही उसके सारे पैसे डूब गए।
अब हालत यह है कि शादीशुदा युवक के बच्चों की पढ़ाई छूट गई है और घर में खाने तक की दिक्कत हो गई है। परेशान युवक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई है।
आखिर क्या है ऑप्शन ट्रेडिंग?
ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) शेयर बाजार का एक ऐसा तरीका है, जिसमें आप सीधे शेयर नहीं खरीदते। इसमें आप भविष्य में किसी तय कीमत पर शेयर खरीदने या बेचने का अधिकार खरीदते हैं। इस अधिकार के बदले जो रकम दी जाती है, उसे प्रीमियम कहा जाता है। ऑप्शन दो तरह के होते हैं:
✅ कॉल ऑप्शन:
यह आपको तय समय के भीतर तय कीमत पर शेयर खरीदने का अधिकार देता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी शेयर की कीमत आज 100 रुपये है और आपने कॉल ऑप्शन लिया कि एक महीने तक आप 100 रुपये में खरीद सकते हैं। अगर एक महीने बाद दाम 150 रुपये हो जाए, तो आप सस्ते में खरीदकर मुनाफा कमा सकते हैं।
✅ पुट ऑप्शन:
यह तय कीमत पर शेयर बेचने का अधिकार देता है। जैसे, आपने पुट ऑप्शन लिया कि आप 100 रुपये में शेयर बेच सकते हैं। अगर कीमत 60 रुपये रह जाए, तब भी आप 100 रुपये में बेचकर प्रॉफिट कमा सकते हैं।
फिर कैसे हो गया नुकसान?
ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) का सबसे बड़ा खतरा यह है कि बाजार आपके अनुमान के मुताबिक नहीं चलता। अगर शेयर का दाम आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा या घटा तो आपका पूरा प्रीमियम डूब जाता है। खासकर ऑप्शन बेचने में अनलिमिटेड नुकसान का जोखिम रहता है, क्योंकि अगर बाजार तेजी से उल्टी दिशा में चला गया तो नुकसान की कोई सीमा नहीं होती।
निवेशकों को क्या सीख लेनी चाहिए?
✅ जल्दी अमीर बनने के चक्कर में उधार लेकर ट्रेडिंग करना भारी गलती है।
✅ ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) बेहद रिस्की होती है और इसमें एक्सपर्ट नॉलेज जरूरी है।
✅ किसी भी टिप्स या अफवाह पर आंख मूंदकर निवेश नहीं करें।
✅ निवेश हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
✅ फाइनेंशियल प्लानर या सेबी रजिस्टर्ड एडवाइजर की सलाह लेना बेहतर है।






