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CM मान बोले—हरियाणा में A+ रैंकिंग यूनिवर्सिटी, फिर भी छात्र पंजाब क्यों आते पढ़ने? NZC बैठक में गरमाया विवाद

नई दिल्ली, — दिल्ली में हुई नॉर्थ जोन काउंसिल (NZC) की अहम बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई बड़े मुद्दे जोरदार तरीके से उठाए। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की, जिसमें हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम मान ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने पंजाब के जल, संसाधनों और संस्थानों से जुड़े अधिकारों को लेकर सरकार की स्थिति मजबूती से रखी।

पंजाब की 1600 करोड़ की बकाया राशि का मुद्दा उठा

सीएम मान ने कहा कि पंजाब जब अपनी 1600 करोड़ रुपये की बकाया राशि मांगता है, तो उसे वापस नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि कई राज्य 1952 और 1966 के फैसलों का हवाला देते हैं, लेकिन जब पंजाब पुनर्गठन की बात करता है, तो उसी तर्क को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
मान ने याद दिलाया कि हरियाणा पहले ही पंजाब यूनिवर्सिटी से अलग हो चुका है और इस विवाद के बीज उसी दौर में बोए गए थे जब बंसीलाल हरियाणा के मुख्यमंत्री थे।

हरियाणा के पीयू से दोबारा जुड़ने की मांग पर पंजाब का विरोध

सीएम भगवंत मान ने बताया कि हरियाणा अब अंबाला, कुरुक्षेत्र और सहारनपुर के कॉलेजों को दोबारा पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) से एफिलिएट करने की मांग कर रहा है, जिसका पंजाब ने विरोध किया है।
मान का आरोप है कि हरियाणा लगातार पीयू की सीनेट और सिंडिकेट पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी विवाद के चलते सीनेट भंग भी की गई, पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

पंजाब के पानी पर राजस्थान का दावा, बैठक में गर्मा हुआ मुद्दा

बैठक में पंजाब के पानी का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। राजस्थान ने फिरोजपुर, हरिके और रोपड़ हेडवर्क्स का नियंत्रण अपने हाथों में लेने की मांग रखी।
इस पर सीएम मान ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि पंजाब के पास पानी की पहले ही कमी है, ऐसे में किसी भी बाहरी दखल की अनुमति नहीं दी जा सकती।

CM मान का सवाल—हरियाणा में A+ रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी, फिर भी छात्र पंजाब क्यों?

बैठक के दौरान मान ने हरियाणा पर तीखा सवाल दागा:
“जब कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की रैंकिंग A+ है, तो हरियाणा के विद्यार्थी पंजाब में पढ़ाई करने क्यों आते हैं?”
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार एक तरफ पीयू में हिस्सेदारी की मांग करती है, दूसरी तरफ उसके विद्यार्थी पंजाब के कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। इसे उन्होंने “विडंबना” बताया।

मुख्यमंत्री का सीधा संदेश

सीएम भगवंत मान ने स्पष्ट कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी पंजाब की भावनाओं और पहचान से जुड़ी संस्था है और किसी भी तरह का राजनीतिक कब्ज़ा या बाहरी दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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