कॉमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को सात साल तक परमिट की छूट, इन वाहनों को भी राहत

देश में प्रदूषण कम करने और साफ ईंधन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, एथेनॉल और मेथनॉल से चलने वाले कॉमर्शियल वाहनों को सात साल तक परमिट लेने की जरूरत नहीं होगी। इसका मतलब है कि स्वच्छ ईंधन से चलने वाले ट्रक, बस और सामान ढोने वाले ऐसे वाहनों को बड़ी राहत मिलने वाली है। आम तौर पर ट्रक, बस और दूसरे बड़े वाहनों को सडक़ पर चलाने के लिए परमिट लेना पड़ता है। इसके लिए पैसे और कागजी काम भी करना होता है, लेकिन अब साफ ईंधन से चलने वाले वाहनों को इस नियम से सात साल के लिए छूट दी गई है। इससे वाहन मालिकों का समय और पैसा दोनों बचेंगे।
साथ ही ज्यादा लोग नए और प्रदूषण कम करने वाले वाहनों को खरीदने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। यह फायदा उन कॉमर्शियल वाहनों को मिलेगा, जो इलेक्ट्रिक बैटरी, हाइड्रोजन, एथेनॉल या मेथनॉल जैसे साफ ईंधन से चलते हैं। इसमें ट्रक, बस और सामान ले जाने वाले दूसरे वाहन शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से देश में ज्यादा इलेक्ट्रिक और अन्य साफ ईंधन वाले वाहन सडक़ों पर दिखाई देंगे। बता दें कि इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, एथेनॉल और मेथनॉल जैसे ईंधन पेट्रोल और डीजल की तुलना में कम प्रदूषण करते हैं। इनका इस्तेमाल बढऩे से हवा साफ रखने में मदद मिल सकती है। सरकार का यह कदम देश में साफ और बेहतर परिवहन व्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।






