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हिमाचल में मानसून का कहर जारी: 184 मौतें, बुनियादी ढांचे और सेवाएं बुरी तरह प्रभावित

शिमला, 4 अगस्त 2025: हिमाचल प्रदेश में इस साल का मानसून अब तक के सबसे विनाशकारी रूप में सामने आया है। भारी बारिश और भूस्खलनों ने राज्य के जनजीवन को तहस-नहस कर दिया है। 20 जून से 3 अगस्त तक मानसून के दौरान हुई घटनाओं में अब तक 184 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 103 मौतें सीधे बारिश, भूस्खलन, अचानक बाढ़, बादल फटने, डूबने और बिजली के झटके जैसी आपदाओं के कारण हुईं, जबकि 81 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश से कुल 309 सड़कें अवरुद्ध हैं, जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग 305 प्रमुख रूप से प्रभावित है। इसके अलावा, 236 जलापूर्ति योजनाएं और 113 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) भी बंद पड़े हैं, जिससे जनता को पेयजल और बिजली की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

हिमाचल में फिर फटा बादलमंडी जिला सबसे अधिक प्रभावित है, जहां 23 बारिश से संबंधित मौतें और 14 सड़क दुर्घटनाओं में मौतें हुई हैं। मंडी में 167 सड़कें बंद हैं, 74 जल आपूर्ति योजनाएं और 91 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए हैं। कांगड़ा और कुल्लू जिलों में भी भारी तबाही हुई है, जबकि लाहौल-स्पीति में पुल ढहने से कई इलाकों का संपर्क कट गया है।

SDMA ने भविष्य के लिए चेतावनी जारी की है कि बारिश अभी भी जारी रह सकती है, जिससे भूस्खलन, बाढ़ और सेवाओं के ठप होने का खतरा बना हुआ है। राहत और पुनर्वास कार्य पूरे राज्य में तेजी से चल रहे हैं।

भारतीय मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों में भी बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है।

इस भीषण आपदा ने हिमाचल के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों को प्रभावित किया है, बुनियादी सेवाओं के क्षतिग्रस्त होने से जनजीवन सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा। सरकार और संबंधित एजेंसियां राहत एवं पुनर्निर्माण के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके।

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