राज्यसभा में सोमवार को ‘भारत के संविधान की 75 साल की गौरवशाली यात्रा’ पर बहस के दौरान विपक्षी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा और आरएसएस पर कड़ा हमला बोला। खड़गे ने कहा कि संविधान का अपमान करने वाले आज हमें उपदेश दे रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पढ़ाई की है, जहां के छात्र प्रगतिशील विचारधारा से प्रेरित होते हैं और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हालांकि, आज वही लोग लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करने की बात कर रहे हैं।
खड़गे ने संविधान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सभी को संविधान और उसकी प्रस्तावना का पालन करना चाहिए। उन्होंने इतिहास की ओर इशारा करते हुए कहा कि जनसंघ (जो बाद में भाजपा बनी) ने कभी मनुस्मृति के आधार पर संविधान बनाने का लक्ष्य रखा था। यही आरएसएस की मंशा थी। खड़गे ने कहा, “तिरंगे, अशोक चक्र और संविधान का तिरस्कार करने वाले आज हमें उपदेश दे रहे हैं।” उन्होंने याद दिलाया कि 1949 में आरएसएस नेताओं ने भारत के संविधान का विरोध किया था क्योंकि यह मनुस्मृति पर आधारित नहीं था। खड़गे ने यह भी कहा कि 26 जनवरी 2002 को आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा फहराने के लिए अदालत के आदेश की आवश्यकता पड़ी, क्योंकि पहले उन्होंने तिरंगे का सम्मान नहीं किया था।
खड़गे ने संविधान को भारतीय समाज में समानता और न्याय की नींव बताया और कहा कि यह जाति, पंथ, लिंग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ता। उन्होंने चेतावनी दी कि संविधान के लिए आज भी खतरे मौजूद हैं और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। यह भी पढ़ें : Sambhal Shiv Mandir: जानिए कितना पुराना है संभल में मिला प्राचीन शिव मंदिर, क्यों 46 सालों से था बंद?
इस बहस में खड़गे ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के योगदानकर्ताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम, महत्वपूर्ण आंदोलनों और विचारधाराओं का परिणाम है। उन्होंने विशेष रूप से सरदार पटेल की अध्यक्षता में 1931 में कराची कांग्रेस अधिवेशन में नेहरू द्वारा मौलिक अधिकारों और आर्थिक नीतियों पर लाए गए प्रस्ताव का जिक्र किया, जिसे पारित किया गया था। खड़गे ने यह भी कहा कि आरएसएस और भाजपा के नेता न तो महात्मा गांधी, न ही जवाहरलाल नेहरू और न ही डॉ. भीमराव अंबेडकर का सम्मान करते हैं।
इसके अलावा, खड़गे ने 1971 के युद्ध में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटते हुए 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ लिया और “आयरन लेडी” के रूप में देश को गर्व महसूस कराया। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार से कदम उठाने का भी आह्वान किया।






