Aaj Ka Panchang 20 September 2025: आज का ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और शुभ समय, जानिए शनिवार का पूरा पंचांग

Aaj Ka Panchang 20 September 2025: शनिवार का दिन पंचांग के अनुसार विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व रखता है। आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो रात 11:47 के बाद अमावस्या में प्रवेश करेगी। ऐसे में आज का दिन श्राद्ध, तर्पण और पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त और अशुभ काल का विचार किया जाता है। आइए जानें आज का सूर्योदय, सूर्यास्त, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया के अनुसार आज के दिन की संपूर्ण जानकारी।
सूर्योदय और सूर्यास्त
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सूर्योदय: प्रातः 05:37 बजे
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सूर्यास्त: सायं 05:48 बजे
ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:08 से 04:56 तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:53 से 12:41 तक
(यह समय विशेष रूप से कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने के लिए सबसे उत्तम माना गया है।)
आज की तिथि, नक्षत्र, योग और करण
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तिथि: चतुर्दशी (रात्रि 11:47 के बाद अमावस्या)
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नक्षत्र: मघा (उपरांत पूर्वा फाल्गुनी)
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योग: साध्य
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करण: शकुनि
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वार: शनिवार
ग्रह स्थिति (सूर्योदय कालीन)
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सूर्य: कन्या
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चंद्रमा: सिंह
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मंगल: तुला
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बुध: कन्या
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गुरु: मिथुन
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शुक्र: सिंह
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शनि: कुम्भ
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राहु: कुम्भ
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केतु: सिंह
आज का चौघड़िया (शुभ-अशुभ समय)
| समय | मुहूर्त | फल |
|---|---|---|
| 06:00 – 07:30 बजे | काल | अशुभ |
| 07:30 – 09:00 बजे | शुभ | शुभ |
| 09:00 – 10:30 बजे | रोग | अशुभ |
| 10:30 – 12:00 बजे | उद्वेग | मध्यम |
| 12:00 – 01:30 बजे | चर | शुभ |
| 01:30 – 03:00 बजे | लाभ | उत्तम |
| 03:00 – 04:30 बजे | अमृत | सर्वोत्तम |
| 04:30 – 06:00 बजे | काल | अशुभ |
राहुकाल और दिशा शूल
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राहुकाल: प्रातः 09:00 से 10:30 बजे तक
इस समय किसी भी शुभ कार्य को टालें। -
दिशा शूल: नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) और पूर्व दिशा
इन दिशाओं में यात्रा करने से बचें या तुलसी सेवन कर निकलें।
खरीदारी और नए कार्य के लिए शुभ मुहूर्त
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दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक
खरीदारी, निवेश, वाहन खरीदने, या नया काम शुरू करने के लिए श्रेष्ठ समय।
आज का पूजा-पाठ और उपाय
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देव आराधना: श्री हनुमान जी की उपासना विशेष फलदायी होगी।
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उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और गुड़ का दान करें।
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शुभ मंत्र:
“ॐ सौम्यरुपाय विद्महे वाणेशाय धीमहि तन्नौ सौम्यः प्रचोदयात्।”






