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हरियाणा की कला कार्यशाला में उभरे नए रंग, शिक्षकों को मिली नई दिशा

पंचकूला, 11 दिसंबर (सुमन)– हरियाणा मौलिक शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में आयोजित राज्य स्तरीय जिलावार कला कार्यशाला का तीसरा चरण आज सफलता पूर्वक संपन्न हो गया। कार्यशाला ने कला शिक्षकों को उनकी छुपी हुई प्रतिभाओं को पहचानने और निखारने का अवसर प्रदान किया।

कला प्रदर्शनी में दिखा रचनात्मकता का अनूठा संगम
पंचकूला और अंबाला जिलों के शिक्षकों द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी में पोस्टर मेकिंग, स्टिल लाइफ, मिट्टी से बनी कलाकृतियां, लिप्पन कला, क्राफ्ट वर्क, रंगोली, और ऑयल पेस्टल रचनाओं ने सभी का ध्यान खींचा। प्रदर्शनी का अवलोकन जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संध्या छिकारा और खंड शिक्षा अधिकारियों ने किया।

“छात्रों के विकास में होगी कला की अहम भूमिका”
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी संध्या छिकारा ने कहा, “इस कार्यशाला ने शिक्षकों को उनकी कला में निखार लाने और नई तकनीकों को सीखने का अवसर दिया। इससे छात्रों को भी लाभ मिलेगा, जो इन कलाओं को सीखकर आगे बढ़ेंगे।”

शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी कार्यशाला
रायपुर रानी के राजकीय उच्च विद्यालय की कला अध्यापिका लक्ष्मी ने बताया, “वर्षों बाद ब्रश और रंगों के साथ काम करना मेरे लिए एक नई शुरुआत जैसा रहा। यह कार्यशाला मेरे अंदर की सोई हुई प्रतिभा को जागृत करने वाली साबित हुई। अब मैं अपनी सीखी हुई कला को छात्रों के साथ साझा करूंगी।”

नए अध्याय की शुरुआत
कार्यशाला के अंतिम दिन मास्टर ट्रेनर सविता ने क्राफ्ट कला में नई तकनीकें सिखाईं और प्रतिभागियों से अद्वितीय कलाकृतियां बनवाईं। यह पहल न केवल शिक्षकों के लिए रचनात्मकता का नया मंच बनी, बल्कि छात्रों को कला के माध्यम से सीखने और अपनी सोच को विस्तार देने की दिशा में प्रेरित करेगी।

हरियाणा मौलिक शिक्षा विभाग की यह पहल कला और शिक्षा के बीच नए आयाम स्थापित कर रही है।

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