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कोई भी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या मंत्री जेल से सरकार नहीं चला सकता: अमित शाह ने किया बड़ा ऐलान

केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृढ़ विश्वास है कि कोई भी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या मंत्री जेल में रहकर सरकार नहीं चला सकता। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में एक नया संविधान संशोधन विधेयक 2025 लेकर आ रही है, जो सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और जवाबदेही को मजबूत करेगा।

130वें संविधान संशोधन विधेयक 2025 का प्रस्ताव

अमित शाह ने कहा कि इस विधेयक के तहत यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र या राज्य के किसी मंत्री को गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों के भीतर जमानत नहीं मिलती, तो उन्हें अपने पद से मुक्त कर दिया जाएगा। वहीं, जमानत मिलने की स्थिति में किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही झूठे मामलों में अदालतों को राहत देने का अधिकार भी मिलेगा।

विधेयक होगा पारदर्शी और निष्पक्ष

शाह का बड़ा बयान

शाह ने साफ किया कि यह विधेयक किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष पर लक्षित नहीं है, बल्कि देश के सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों पर समान रूप से लागू होगा। उन्होंने “गंभीर अपराध” को पाँच साल से अधिक की सजा वाले मामलों के रूप में परिभाषित किया है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकार गंभीर आरोपों से ग्रस्त नेताओं को पद पर बने रहने से रोकना चाहती है।

संसद में दो-तिहाई बहुमत से पारित होना होगा

इस विधेयक को संसद की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा और इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा। अमित शाह ने जोर देकर कहा कि संसद में विधेयकों पर बहस और चर्चा होनी चाहिए, न कि व्यवधान, और विपक्ष को इसका स्वागत करना चाहिए।

जेल में बंद नेता नहीं ले सकते सरकारी फैसले

अमित शाह ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कुछ नेताओं ने जेल जाने पर इस्तीफा दिया था, लेकिन अब कुछ जेल में रहकर भी पद पर बने रहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारी जेल में बंद नेताओं से आदेश लेने के लिए मजबूर होंगे।

प्रधानमंत्री पद को भी संशोधन के दायरे में लाया गया

शाह ने बताया कि 39वें संविधान संशोधन के समय प्रधानमंत्री पद को कानून के दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भी संशोधन में शामिल किया है, जो सरकार की नैतिकता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

नैतिकता पर बल, चुनावी सफलता से ऊपर

गृह मंत्री ने कहा कि नैतिकता चुनाव जीत या हार से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी मूल्य है। उन्होंने बताया कि खुद उन्होंने भी सीबीआई द्वारा तलब किए जाने के बाद इस्तीफा दिया था और बरी होने तक किसी पद को स्वीकार नहीं किया।

लोकतंत्र को मिलेगा मजबूती

अमित शाह ने आश्वासन दिया कि यह कानून लोकतंत्र को मजबूत करेगा और अदालतें ऐसे मामलों में जमानत पर त्वरित निर्णय सुनिश्चित करेंगी। साथ ही, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा पाए किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो जाएगी, जो जवाबदेही को सिद्ध करता है।

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