One Nation, One Election: भारत में चुनावों का दौर कभी खत्म नहीं होता। लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों के निरंतर चक्र के कारण देश लगभग हर समय “चुनावी मोड” में रहता है। ऐसे में “One Nation, One Election” यानी “एक देश-एक चुनाव” की व्यवस्था को एक ऐतिहासिक सुधार माना जा रहा है, जो न सिर्फ राजनीतिक परिदृश्य बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकता है।
हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने इस विषय पर संबंधित विधेयकों को मंजूरी दी है, जिससे इस मुद्दे को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से इस व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं। उनका मानना है कि एक साथ चुनाव होने से शासन व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अधिक समय मिलेगा और देश की विकास प्रक्रिया में तेजी आएगी।
क्या है “One Nation, One Election”?
“एक देश-एक चुनाव” का अर्थ है कि लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएं। इसके साथ-साथ स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायत) भी एक तय समय सीमा में पूरे किए जा सकते हैं।
आजादी के बाद भारत में चुनावी प्रक्रिया
आजादी के बाद 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते थे। लेकिन राज्यों के पुनर्गठन, अस्थिर सरकारों और समय से पहले विधानसभा भंग होने के कारण यह व्यवस्था टूट गई। इसके बाद चुनावों का चक्र बिखर गया और विभिन्न राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे।
वन नेशन-वन इलेक्शन का अर्थव्यवस्था पर असर
1. जीडीपी में वृद्धि
कोविन्द कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, सभी चुनाव एक साथ होने पर भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ में 1.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। वित्त वर्ष 2023-24 के संदर्भ में यह 4.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। यह राशि देश के स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में होने वाले कुल सार्वजनिक खर्च का एक बड़ा हिस्सा कवर कर सकती है।
2. निवेश में सुधार
लगातार चुनावों के कारण देश में निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना रहता है। अलग-अलग चुनावों से नीतिगत फैसलों में देरी होती है। एक साथ चुनाव होने से नेशनल ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (निवेश अनुपात) में 0.5 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है।
3. सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी
एक साथ चुनाव कराने पर सार्वजनिक खर्च में 17.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इसमें सबसे बड़ी वृद्धि पूंजीगत खर्च में देखने को मिलेगी, जिससे बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
4. महंगाई में गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, एक साथ चुनाव होने से महंगाई में लगभग 1.1 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। अलग-अलग चुनावों की तुलना में एक देश-एक चुनाव का असर महंगाई पर अधिक सकारात्मक हो सकता है।
5. राजकोषीय घाटे पर असर
हालांकि चुनावों के बाद सार्वजनिक खर्च बढ़ने से राजकोषीय घाटे में 1.28 प्रतिशत तक की अस्थायी वृद्धि हो सकती है। लेकिन इसका दीर्घकालिक प्रभाव आर्थिक सुधारों और विकास के रूप में देखने को मिलेगा।
दूसरे देशों में “एक साथ चुनाव” की व्यवस्था
अमेरिका: राष्ट्रपति, कांग्रेस और सीनेट के चुनाव हर चार वर्ष में एक निश्चित तारीख को होते हैं।
फ्रांस, स्वीडन और कनाडा: इन देशों में भी राष्ट्रीय और प्रांतीय चुनाव तय समय पर कराए जाते हैं।






