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चंडीगढ़ का स्टेटस बदलने पर केंद्र का यू-टर्न,CM भगवंत मान बोले— बिल वापस लेने का स्वागत

चंडीगढ़ के प्रशासनिक स्टेटस में बदलाव को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि इस संबंध में न तो कोई अंतिम निर्णय हुआ है और न ही आगामी शीतकालीन सत्र में ऐसा कोई बिल लाने की योजना है। गृह मंत्रालय ने कहा कि किसी भी प्रस्ताव पर फैसला सभी संबंधित हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा।

भगवंत मान की प्रतिक्रिया

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने X पर लिखा- “केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ बिल वापस लेने और संसद में न लाने का फैसला किया है, यह स्वागत योग्य है। उम्मीद है कि भविष्य में पंजाब से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले पंजाब के लोगों से सलाह ली जाएगी।”

पिछले दिनों यह रिपोर्ट सामने आई थी कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ को Article 239 की जगह Article 240 के तहत लाने का प्रस्ताव ला सकती है। इससे चंडीगढ़ पूरी तरह केंद्र शासित प्रदेश बन जाता और प्रशासनिक अधिकार राष्ट्रपति व केंद्र के हाथों में आ जाते।

इस प्रस्ताव का पंजाब सरकार, कांग्रेस और अकाली दल ने कड़ा विरोध किया था। विरोध का मुख्य कारण था कि इससे चंडीगढ़ पर पंजाब का पारंपरिक दावा कमजोर हो सकता था।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

1. प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं

गृह मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ से जुड़े कानूनी प्रावधान को सरल बनाने पर विचार चल रहा है, लेकिन इससे चंडीगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था या पंजाब-हरियाणा के पारंपरिक संबंधों में बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है

2. शीतकालीन सत्र में बिल लाने की कोई मंशा नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया कि आने वाले शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई बिल पेश नहीं किया जाएगा

चंडीगढ़ का इतिहास: दो अहम बातें

1. 1952 में नेहरू ने रखी थी नींव

चंडीगढ़ की नींव 1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी और 1953 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया। पेप्सू राज्य की राजधानी पटियाला और पूर्वी पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ थी।

2. 1956 से 1966 तक चंडीगढ़ विधानसभा रहा

1956 में पेप्सू और पूर्वी पंजाब को मिलाकर पंजाब बना, जिसकी राजधानी चंडीगढ़ बनी। 1966 में हरियाणा बनने के बाद विवाद शुरू हुआ और चंडीगढ़ को पंजाब रीऑर्गनाइजेशन एक्ट की धारा 4 के तहत केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया।

70 साल पुराना विवाद: 6 कमिशन भी नहीं निकाल पाए हल

1966 से 1986 तक चंडीगढ़ पर दावा तय करने के लिए छह कमिशन बनाए गए, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। यहां जानिए किस कमिशन ने क्या कहा—

1966 — शाह कमीशन

  • चंडीगढ़ को हरियाणा को देने की सिफारिश

  • तर्क: 71.03% लोग हिंदी भाषी

लेकिन पंजाब में विरोध के बाद निर्णय लागू नहीं हुआ।

1970 — अवॉर्ड

  • चंडीगढ़ पंजाब को दिया जाए

  • बदले में 105 हिंदी भाषी गांव हरियाणा को

  • अवॉर्ड लागू नहीं हुआ

1985 — राजीव-लोंगोवाल समझौता

  • चंडीगढ़ पंजाब को

  • पंजाब के हिंदी भाषी इलाके हरियाणा को

  • मुक्तसर के पास कंडूखेड़ा गांव को लेकर विवाद, समझौता असफल

1985 — मैथ्यू कमिशन

  • 83 गांव हरियाणा को

  • चंडीगढ़ पंजाब को

1986 — रमैया कमिशन

  • चंडीगढ़ के एवज में 70,000–45,000 एकड़ जमीन हरियाणा को

  • नई राजधानी का खर्च केंद्र उठाए

  • जमीन पर विवाद के कारण मामला अटका

देसाई कमिशन

  • हरियाणा को दी जाने वाली जगह का चयन

  • हरियाणा ने 141 गांव मांग लिए

  • मामला फिर लंबित

PEPSU क्या था?

PEPSU यानी पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन, 1948 में बनी एक इकाई थी, जिसमें ये रियासतें शामिल थीं— पटियाला, जींद, नाभा, कपूरथला, फरीदकोट, मलेरकोटला, कालका और नालागढ़। इसकी राजधानी पटियाला थी। 1956 में इसे पंजाब राज्य में मिला दिया गया और चंडीगढ़ को राजधानी बनाया गया।

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