पंजाब बाढ़: केंद्र ने पीएम फसल बीमा योजना अपनाने का दोबारा किया आग्रह

नई दिल्ली, 16 सितंबर: पंजाब में दशकों की सबसे भयंकर बाढ़ ने किसानों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है। इस संकट के बीच केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकार से पुनः आग्रह किया है कि वे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को अपनाएं, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। मंत्रालय ने कहा है कि बीमा योजना न अपनाने से किसान इस संकट में पूरी तरह असहाय हैं।
पंजाब की बाढ़ से भारी तबाही हुई है — 1,902 गाँव जलमग्न हैं, 3.8 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 11.7 लाख हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बर्बाद हो चुकी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 43 लोगों की मौत हो चुकी है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 सितंबर को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर पंजाब सरकार से PMFBY योजना में शामिल होने की अपील की। केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर पंजाब 2026-29 के टेंडर चक्र में योजना अपनाता है, तो केंद्र पूरी वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।
क्यों अभी तक पंजाब PMFBY से बाहर?
पंजाब 2016 से ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल नहीं हुआ है। जबकि नवंबर 2022 में राज्य सरकार ने इस योजना को अपनाने का संकेत दिया था, मार्च 2023 में इसे वापस ले लिया गया। इस फैसले से किसानों को योजना के तहत मिलने वाले तकनीकी दावों के त्वरित निपटान और राष्ट्रीय जोखिम पूल के फायदे नहीं मिल पाए।
PMFBY खरीफ फसलों के लिए मात्र 2% और रबी फसलों के लिए 1.5% प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि शेष लागत केंद्र और राज्य सरकार समान रूप से साझा करते हैं।यह भी पढ़ें :- इंदौर में भयानक हादसा: तेज रफ्तार ट्रक ने कुचले 12 से अधिक लोग, 2 की मौत, वीडियो वायरल
बीमा न होने के गंभीर दुष्परिणाम
पंजाब की कृषि जलवायु परिवर्तनों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है। खरीफ में धान की फसल जलभराव से प्रभावित होती है, वहीं मालवा क्षेत्र में कपास नमी के प्रति संवेदनशील है। रबी सीजन में गेहूँ और सरसों पाले और ठंड के कारण कमजोर हो जाते हैं।
बीमा न होने से छोटे और सीमांत किसान भारी आर्थिक संकट में फंसे हैं। उदाहरण के तौर पर, रबी 2023 में कपास की फसल गुलाबी सुंडी संक्रमण से बर्बाद हो गई, लेकिन राज्य की राहत राशि सीमित रही।
केंद्र सरकार के अनुसार, SDRF/NDRF के तहत फसल नुकसान पर किसानों को केवल 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिलता है, जो कि वास्तविक नुकसान की भरपाई के लिए अपर्याप्त है। इसके विपरीत, PMFBY के तहत प्राकृतिक आपदा के 15-30 दिनों में दावे का निपटान किया जाता है, जिससे किसानों को त्वरित आर्थिक राहत मिलती है।
केंद्र की पहल और पंजाब सरकार का रवैया
केंद्र ने पंजाब सरकार को इस योजना को अपनाने के लिए कई पत्र भेजे हैं, लेकिन अभी तक राज्य से कोई सकारात्मक कदम नहीं देखा गया। अधिकारियों का कहना है कि अगर पंजाब PMFBY को अपनाता तो राहत व्यय में हजारों करोड़ रुपये की बचत होती और केंद्र के वित्तीय योगदान का लाभ भी मिलता।
पंजाब के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और गुजरात भी इस योजना से बाहर हैं, लेकिन पंजाब एकमात्र प्रमुख कृषि राज्य है जिसने इस योजना को अब तक लागू नहीं किया है।






