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हरियाणा में ‘बेटी बचाओ’ को मिली रफ्तार: सख्त निगरानी और रिवर्स ट्रैकिंग से लिंगानुपात में सुधार, 18 FIR और 690 मामलों की जांच पूरी

चंडीगढ़, 22 जुलाई 2025 – हरियाणा सरकार ने लिंगानुपात में सुधार के लिए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को ज़मीन पर गंभीरता से उतारते हुए ठोस कदम तेज़ कर दिए हैं। राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री आरती सिंह राव के निर्देश पर गठित राज्य टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साप्ताहिक समीक्षा बैठकों के चलते नतीजे दिखने लगे हैं।

राज्य के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (डीजीएचएस)  मनीष बंसल की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि 14 से 21 जुलाई 2025 के बीच हरियाणा का लिंगानुपात सुधरकर 917 तक पहुंच गया, जो पिछले साल इसी सप्ताह 860 था। यह बदलाव सरकारी निगरानी, रिवर्स ट्रैकिंग और त्वरित कार्रवाई का परिणाम माना जा रहा है।

आरती सिंह रावतेज़ कार्रवाई और निगरानी से बढ़ी सख्ती

बैठक में खुलासा हुआ कि अब तक 690 रिवर्स ट्रैकिंग मामले पूरे किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक मामले अंबाला जिले में दर्ज हुए। संदिग्ध मामलों में अब तक 18 FIR दर्ज की गई हैं और 13 एफआईआर प्रक्रिया में हैं। कई निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, आशा वर्कर्स और चिकित्सा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

गर्भपात पर सख्त नजर

अवैध गर्भपात पर लगाम लगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (MTP) और 12 सप्ताह से अधिक के गर्भपात के मामलों में रिवर्स ट्रैकिंग की जाए, खासकर तब जब महिला के पहले से एक या अधिक बेटियां हों।

डीजीएचएस का निर्देश: 24 घंटे में रिपोर्ट दें

डीजीएचएस (पी)  कुलदीप सिंह ने सभी सीएमओ को निर्देश दिए कि गर्भपात की सूचना मिलते ही 24 घंटे के भीतर रिवर्स ट्रैकिंग की जाए। साथ ही, पिछले तीन महीनों के एमटीपी मामलों के आंकड़े मांगे गए हैं और ओपीडी स्तर पर स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ समन्वय पर ज़ोर दिया गया है।

लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

कुछ जिलों में रिवर्स ट्रैकिंग में लापरवाही पाए जाने पर टास्क फोर्स ने नाराज़गी जताई और ऐसे अधिकारियों को चार्जशीट करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, फील्ड में और अधिक छापेमारी करने और प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (PIGT) की रिपोर्ट समय पर देने के निर्देश भी दिए गए।

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