हरियाणा में न्याय की नई पहल: गरीब कैदियों को मिलेगा इंसाफ़ और आज़ादी का दूसरा मौका
चंडीगढ़, 24 जुलाई 2025 — हरियाणा सरकार ने न्याय प्रणाली को और अधिक मानवीय और समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह, जेल, आपराधिक जांच एवं न्याय प्रशासन) डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के सभी ज़िलों में ‘गरीब कैदियों को सहायता योजना’ के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। इस योजना के तहत उन कैदियों को राहत दी जाएगी, जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण जमानत या जुर्माना अदा करने में असमर्थ हैं।
प्रत्येक जिले में बनेगी अधिकार प्राप्त समिति
हर जिले में एक सशक्त समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें ज़िला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक, ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, संबंधित जेल अधीक्षक और न्यायपालिका के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति गरीब कैदियों की पहचान करेगी और उन्हें ज़मानत या जुर्माना चुकाने में वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
नोडल अधिकारी और नागरिक समाज की भूमिका अहम
हर समिति में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और सामाजिक कार्यकर्ता, परिवीक्षा अधिकारी या नागरिक समाज के प्रतिनिधि समिति के साथ समन्वय करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पात्र कैदियों को समय पर और प्रभावी सहायता मिले।
जेलों में होगी जागरूकता और निगरानी
डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए हैं कि जिला अधिकारी और जेल अधिकारी नियमित बैठकों, निरीक्षणों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से इस योजना को जमीनी स्तर तक पहुँचाएँ। लाभार्थियों की एक सटीक सूची तैयार कर राहत प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाया जाएगा।
“राहत कागज़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए” — डॉ. मिश्रा
डॉ. मिश्रा ने ज़ोर देते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसका मानवीय प्रभाव दिखना चाहिए। “जो लोग सिर्फ़ गरीबी की वजह से जेल में हैं, उन्हें सम्मान, निष्पक्षता और आज़ादी का अवसर मिलना चाहिए,” उन्होंने कहा।
सभी उपायुक्तों को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि योजना की प्रगति का मूल्यांकन किया जा सके।






