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World hepatitis day : लीवर की खामोश बीमारियों को मात देने के लिए जागरूकता जरूरी – डॉ. राकेश कोचर

World hepatitis day : लीवर की बीमारी अक्सर “साइलेंट किलर” बन जाती है, क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर से सामने आते हैं। “यदि समय रहते लीवर की जांच करवाई जाए, तो गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है,” यह कहना है पारस हेल्थ पंचकूला के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राकेश कोचर का। वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे के मौके पर पारस हेल्थ ने लीवर की सेहत और हेपेटाइटिस के प्रति लोगों को जागरूक करने की मुहिम चलाई।

 

डॉ. कोचर ने बताया कि भारत में हेपेटाइटिस बी और सी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण इलाज देर से शुरू होता है। “भारत में 4 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी और करीब 60 से 120 लाख लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर को अपनी बीमारी का पता ही नहीं है,” उन्होंने कहा।

 

गंभीर खतरे की अनदेखी

ग्रामीण और छोटे शहरों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां जांच और इलाज की सुविधाएं सीमित हैं। डॉ. कोचर ने यह भी आगाह किया कि कुछ आयुर्वेदिक दवाएं और हर्बल सप्लीमेंट्स बिना डॉक्टरी सलाह के लेने से भी लीवर को भारी नुकसान हो सकता है।

 

पारस हेल्थ में उन्नत जांच सुविधाएं

पारस हेल्थ पंचकूला में लीवर की जांच के लिए फाइब्रोस्कैन, लीवर फंक्शन टेस्ट (LFT), एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी और लीवर बायोप्सी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। अस्पताल में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीकों के माध्यम से जटिल बीमारियों की पहचान और इलाज संभव हो रहा है।

 

पारस हेल्थ जल्द ही लीवर ट्रांसप्लांट यूनिट भी शुरू करने जा रहा है, जिससे गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।

 

रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज

अस्पताल का मानना है कि समय पर जांच, सही जानकारी और विशेषज्ञ इलाज से हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों को रोका जा सकता है। “हमारा उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग समय रहते अपनी जांच कराएं और लीवर की बीमारियों को बढ़ने से पहले ही नियंत्रित किया जा सके,” डॉ. कोचर ने कहा।

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