राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल हादसा: 78 साल पुरानी बिल्डिंग बनी मौत का कारण, 7 की मौत, 35 दबे, देश भर में गूंजा दर्द
राजस्थान के झालावाड़ जिले के छोटे से गांव पीपलोदी में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे एक सरकारी स्कूल की छत और दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। हादसे के वक्त बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। घटना में 6 मासूम छात्र और एक शिक्षक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 28 छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। राहत और बचाव कार्य के दौरान पूरे इलाके में कोहराम मच गया।
हादसे की वजह क्या थी?
स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल की इमारत 1947 में बनी थी और बीते कुछ वर्षों से इसकी हालत बेहद जर्जर थी। बरसात के मौसम में पहले भी दीवारों से पानी टपकने और सीलन की शिकायतें की जा चुकी थीं, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हादसे के वक्त भी इलाके में तेज बारिश हो रही थी, जिससे छत की कमजोर संरचना ढह गई।
चीख-पुकार और बचाव कार्य
घटना के तुरंत बाद स्कूल का स्टाफ और गांववाले मौके पर पहुंचे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर हर कोई दहशत में आ गया। पुलिस और प्रशासन ने जेसीबी की मदद से मलबा हटाना शुरू किया। करीब दो घंटे चले रेस्क्यू के बाद बच्चों और शिक्षकों को मलबे से बाहर निकाला गया। गंभीर रूप से घायलों को मनोहरथाना के सीएचसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इलाज और सरकार की मदद
राज्य सरकार ने घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने का ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री मदन दिवालर ने कहा कि घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दुख जताते हुए कहा कि यह हादसा हृदयविदारक है, और संबंधित अधिकारियों को तत्काल राहत और चिकित्सा कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
देशभर में शोक की लहर
घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि, “झालावाड़ में स्कूल में हुआ हादसा अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी घटना को लेकर सरकार को घेरा और सरकारी स्कूलों की बदहाली पर सवाल उठाए।
पुरानी इमारतें बन रहीं मौत का घर
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई थी, लेकिन भवन की मरम्मत नहीं कराई गई। सवाल यह उठता है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में सरकारी मशीनरी आंखें मूंदे बैठी रहती है?






