चंडीगढ़

चंडीगढ़ रियल एस्टेट नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, शेल कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज

चंडीगढ़ रियल एस्टेट नेटवर्क पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, शेल कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच तेज

चंडीगढ़। Major ED Action Against Chandigarh Real Estate Network, ट्राइसिटी के चर्चित रियल एस्टेट नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए इंफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) ने अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। रायल बिल्डर और रायल एस्टेट ग्रुप से जुड़े मामले में एजेंसी को शुरुआती जांच के दौरान करोड़ों रुपये शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए जाने के संकेत मिले हैं।

इसके साथ ही ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) और पंजाब टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है जिन्होंने संबंधित प्रोजेक्ट्स को मंजूरियां और सीएलयू (चेंज आफ लैंड यूज) दी थी। रियल एस्टेट सेक्टर में सक्रिय वित्तीय नेटवर्क, शेल कंपनियों और मंजूरियों से जुड़े कई अहम लिंक सामने आ सकते हैं।

अधिकारियों को समन भेजने की तैयारी

ईडी अब उन अफसरों को समन भेजने की तैयारी में है जिनके कार्यकाल में प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली या वित्तीय शर्तों के बावजूद निर्माण गतिविधियां आगे बढ़ीं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या नियमों की अनदेखी कर परियोजनाओं को फायदा पहुंचाया गया और क्या अधिकारियों को वास्तविक वित्तीय स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अनुमति दी गई।

बीते मंगलवार को ईडी की चंडीगढ़ और दिल्ली यूनिटों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़, मोहाली, जीरकपुर और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कई परिसरों पर छापेमारी की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल डाटा, बैंकिंग रिकार्ड, प्रापर्टी दस्तावेज और कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़ी फाइलें कब्जे में ली गईं।

अलग-अलग कंपनियों में फंड ट्रांसफर का संदेह

जांच एजेंसी को संदेह है कि खरीदारों और निवेशकों से जुटाई गई रकम को सीधे प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय अलग-अलग कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। कई संदिग्ध इंटर-कंपनी ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जिनमें कम कारोबारी गतिविधि वाली कंपनियों के खातों में भारी रकम भेजे जाने के संकेत मिले हैं। ईडी अब इन कंपनियों के निदेशकों, शेयरहोल्डिंग पैटर्न और बैंकिंग लेनदेन की जांच कर रही है।

एजेंसी यह भी जांच रही है कि कहीं शेल कंपनियों का इस्तेमाल सिर्फ फंड की लेयरिंग और मनी ट्रेल छिपाने के लिए तो नहीं किया गया। जांच में कुछ ऐसे बैंक खाते भी सामने आए हैं जिनमें प्रोजेक्ट से जुड़ी रकम कई स्तरों पर ट्रांसफर की गई। ईडी को आशंका है कि फंड को अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से घुमाकर वास्तविक उपयोग और स्रोत छिपाने की कोशिश की गई।

बीते साल जुलाई में दर्ज हुआ था मामला

पूरा मामला पंजाब पुलिस द्वारा 19 जुलाई 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। केस चंडीगढ़ रायल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। आरोप है कि मोहाली के कराला गांव स्थित रिहायशी कालोनी परियोजना में गमाडा की देनदारियों का भुगतान जानबूझकर नहीं किया गया और करीब 232.67 करोड़ रुपये के चेक बाउंस हुए।

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