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उद्योग विशेषज्ञों का दावा, E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों को कोई नुकसान नहीं

नई दिल्ली। वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने E20 से पुराने वाहनों को नुकसान की बात को खारिज करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसे जो भी “छिटपुट मामले” सामने आए हैं उनमें ईंधन में मिलावट के कारण नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा आयोजित एक प्रेस वार्ता में हुंडई मोटर इंडिया के पुनीत आनंद, हीरो मोटोकॉर्प के आशुतोष वर्मा, इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला, बजाज ऑटो के मनप्रीत सिंह बिंद्रा, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के भारतीय कारोबार के प्रमुख विक्रम गुलाटी और मारुति सुजुकी इंडिया के राहुल भारती ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथोनॉल मिलाकर तैयार ईंधन (ई20) नए और पुराने वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। सभी हितधारकों से चर्चा और काफी गहन वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इनके इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

श्री भारती ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर एथेनॉल के उपयोग को लेकर सामने आ रही चिंताओं के संबंध में कहा कि साल 2023 में ई20 लागू होने से पहले ई10 मानक था, लेकिन कंपनियां वाहनों को मानकों से कुछ अधिक स्तर पर परखती हैं। उन्होंने कहा, “निर्माता के रूप में हमने 2023 से पहले के ई10 वाहनों में ई20 ईंधन का परीक्षण सभी प्रदर्शन मानकों पर किया है और हमें कोई चिंता की बात नहीं मिली है। यह हमारा विश्वास और आश्वासन है।” बाद में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि ई10 ईंधन पिछले 15 साल से बाजार में उपलब्ध है। हमने ई10 के लिए डिजाइन किए गए वाहनों पर ई20 ईंधन का आंतरिक रूप से परीक्षण किया गया। कंपनी के आंतरिक मूल्यांकन में कोई ऐसी समस्या नहीं मिली जो चिंता का कारण बने।

श्री गुलाटी ने कहा कि एथेनॉल एक बहुत अच्छा ईंधन है, जिसका ऑक्टेन रेटिंग अधिक होता है और यह बेहतर ड्राइविंग अनुभव देता है। यह नया ईंधन नहीं है, 20वीं सदी के शुरुआती दौर में भी इसका उपयोग होता था। इसका उपयोग फॉर्मूला-1 रेसिंग कारों में भी किया जाता है। प्रदर्शन, एक्सीलरेशन और इंजन क्षमता के दृष्टिकोण से यह एक बेहतरीन ईंधन है।

टोयोटा किर्लोस्कर के वाहन से जुड़े एक मामले के बारे में उन्होंने कहा कि जांच में पाया गया कि समस्या मानक ईंधन से संबंधित नहीं थी। उस ईंधन में अशुद्धियां थीं और अत्यधिक पानी मिला हुआ था। ईंधन टैंक और फ्यूल लाइनों को साफ कर दूषित ईंधन को हटाने के बाद वाहन में मानक ई20 ईंधन भरा गया। उसके बाद किसी भी हिस्से को कोई नुकसान नहीं हुआ। वाहन का परीक्षण किया गया और वह सामान्य रूप से चला।

श्री वर्मा ने कहा कि हीरो मोटोकॉर्प के सर्विस डेटा के विश्लेषण में ई20 से चलने वाले वाहनों में पुराने ईंधन से चलने वाले वाहनों की तुलना में किसी भी प्रकार के अधिक नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसलिए “हम इन सभी चिंताओं को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं”।

श्रीमती शुक्ला ने कहा कि यह वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है। एथेनॉल उत्पादन में पानी के उपयोग, एथेनॉल से मिलने वाले फायदे और देश की उत्पादन क्षमता के बारे में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जानकारी सार्वजनिक की है। कनाडा, अमेरिका, ब्राज़ील, पैराग्वे और जर्मनी जैसे कई देश वर्षों से ईंधन में एथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं।

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