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गंगा नदी में बहकर आया ‘रामसेतु’ जैसा चमत्कारिक पत्थर, 2 क्विंटल का भारी पत्थर फिर भी डूब नहीं रहा

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में इन दिनों गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ते जलस्तर के बीच कोतवाली क्षेत्र के ददरी घाट पर एक बड़ा चमत्कार सामने आया है। सुबह एक भारी पत्थर नदी में बहकर आया, जिसका वजन करीब दो कुंतल बताया जा रहा है, लेकिन यह पत्थर गंगा के तेज बहाव के बावजूद पानी में डूबने से इनकार कर रहा है।

इस घटना की जानकारी जैसे ही इलाके में फैली, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग ददरी घाट पर एकत्रित हो गए। कई लोगों ने इस पत्थर की पूजा शुरू कर दी, तो कई श्रद्धालु वहीं पर धार्मिक पाठ करते नजर आए। स्थानीय लोग इस पत्थर को भगवान राम द्वारा समुद्र पार करने के लिए बनवाए गए रामसेतु के पत्थरों से जोड़कर देख रहे हैं।

 गंगा में बहकर आया ‘रामसेतु’ का पत्थर?

रामसेतु से जुड़ी आस्था

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेताकाल में जब भगवान राम को समुद्र पार करना था, तब वानर सेना ने रामसेतु का निर्माण किया था। उस समय जिन पत्थरों से रामसेतु बनाया गया था, वे पानी में डूबते नहीं थे बल्कि तैरते थे। यही वजह है कि आज ददरी घाट पर पाया गया पत्थर भी पानी में डूबने के बजाय तैरता नजर आ रहा है। हालांकि वैज्ञानिक जांच के बाद ही पत्थर के बारे में सच्चाई सामने आ सकेगी, पर स्थानीय लोग इसे रामसेतु से जोड़कर देखते हैं।

किसने देखा सबसे पहले?

पत्थर को सबसे पहले एक 10-15 साल के बच्चे सोनू ने देखा था। वह नदी में नहा रहा था, तभी उसे नदी में कुछ तैरता हुआ दिखाई दिया। सोनू ने रस्सी की मदद से पत्थर को घाट के किनारे बांध दिया। अगले दिन जब अन्य लोग घाट पर नहाने आए, तो उन्होंने भी इस अनोखे पत्थर को पानी में तैरता पाया और उनकी श्रद्धा बढ़ गई।

 गंगा में बहकर आया ‘रामसेतु’ का पत्थर?

श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था

पत्थर सीमेंट जैसा दिखता है, लेकिन पानी में डूबने से इनकार कर रहा है। इसे सनातन धर्म का चमत्कार माना जा रहा है। श्रद्धालुओं ने पत्थर पर हनुमान जी का झंडा लगाया है और लगातार पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कई लोग अगरबत्ती जलाकर इस अनोखे पत्थर के सामने मनोकामनाएं मांगते हुए देखे जा रहे हैं।

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