हरियाणा DGP ओपी सिंह का डिजिटल अरेस्ट पर बड़ा बयान: “पहले सौ गालियां निकालें, फिर पुलिस को सूचना दें”

चंडीगढ़: हरियाणा के DGP ओपी सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने साफ कहा है कि “डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती, ये सब दो कौड़ी के बहुरूपियों की ठगी है। अगर कोई ऐसी नौटंकी करे, तो पहले उसे सौ गालियां दो, फिर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराओ।”

डिजिटल अरेस्ट पर DGP की कड़ी टिप्पणी
डीजीपी ने कहा कि ठग खुद को पुलिस, CBI या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फर्जी वारंट दिखाकर ठगी करते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा पुलिस ने ऐसे साइबर अपराधियों की “मरम्मत” के लिए विशेष साइबर कमांडो तैनात कर दिए हैं।
बुलेट–थार वाले बयान के बाद दोबारा चर्चा में DGP
कुछ दिन पहले ही DGP ओपी सिंह का बयान सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि थार और बुलेट पर बदमाश चलते हैं, इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके बयान पर पूर्व डिप्टी CM दुष्यंत चौटाला ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अपराधियों को वाहन से जोड़कर पहचानना ठीक नहीं।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट एक संगठित साइबर ठगी है। इसमें अपराधी—
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खुद को पुलिस/आयकर अधिकारी बताते हैं
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गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं
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वीडियो कॉल पर नकली पुलिस स्टेशन दिखाते हैं
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घंटों पीड़ित को कॉल पर “बंधक” रखते हैं
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पैसों या बैंकिंग डिटेल्स की मांग करते हैं
डिजिटल अरेस्ट कैसे काम करता है?
1. धमकी और डराना
ठग तुरंत गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हैं।
2. नकली पहचान
वे पुलिस, CBI, NIA या IT विभाग का अधिकारी बनकर बात करते हैं।
3. वीडियो कॉल का जाल
नकली बैकग्राउंड लगाकर असली थाना जैसा सेटअप दिखाया जाता है।
4. पैसों की मांग
UPI, बैंक ट्रांसफर द्वारा तुरंत भुगतान करवाया जाता है।
5. व्यक्तिगत जानकारी चोरी
OTP, बैंक खाते, KYC जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें? (DGP की सलाह)
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कोई भी अधिकारी फोन पर पैसे नहीं मांगता — याद रखें।
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संदिग्ध कॉल पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
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किसी भी कॉलर को व्यक्तिगत जानकारी या OTP ना दें।
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कॉल की पुष्टि सरकारी हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से करें।
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डराने वाली कॉल को अनदेखा करें और नंबर ब्लॉक कर दें।






