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गांव की बेटी ने किया कमाल: 50 लाख का ट्यूशन स्टार्टअप खड़ा कर देश-विदेश में मचाई धूम

 मंदसौर, मध्य प्रदेश – एक छोटे से गांव से निकली नेहा मुजावदिया ने वो कर दिखाया जो लाखों लोग सिर्फ सपनों में सोचते हैं। कभी गांव के सरकारी स्कूल में हिंदी माध्यम से पढ़ने वाली नेहा ने आज 50 लाख रुपये का एजुकेशन स्टार्टअप TutorCabin खड़ा कर लिया है और देश-विदेश में अपने टैलेंट से पहचान बनाई है।

गांव से इंदौर तक का संघर्षमय सफर

नेहा का सफर शुरू हुआ मंदसौर जिले के छोटे से गांव मेलखेड़ा से, जहां उन्होंने 8वीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में की। गांव में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर सीमित सोच थी, शादी का दबाव था, लेकिन नेहा ने हार नहीं मानी। घरवालों के समर्थन से वह आगे बढ़ीं और इंदौर से MBA किया।

कोचिंग की नौकरी से स्टार्टअप की उड़ान

इंदौर में एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाते हुए नेहा को महसूस हुआ कि लाखों की फीस लेने के बावजूद छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही। तभी उनके मन में एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का विचार आया, जो गांव और छोटे शहरों के बच्चों को भी क्वालिटी एजुकेशन दे सके।

2018 में सिर्फ ₹50,000 से की शुरुआत

नेहा ने अपने कुछ टीचर दोस्तों के साथ मिलकर 2018 में TutorCabin की शुरुआत की। पहले सिर्फ 20 छात्रों से शुरू हुआ यह स्टार्टअप, आज हजारों छात्रों की उम्मीद बन चुका है। पहले ही साल में 5 लाख रुपये का रेवेन्यू हुआ और इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

IIM बेंगलुरु और भारत सरकार ने किया सम्मानित

नेहा की मेहनत और लगन को पहचान मिली IIM बेंगलुरु से, जहां उन्हें Best Startup Award मिला। वहीं, भारत सरकार की ओर से दुबई भेजे गए शिक्षा प्रतिनिधिमंडल में भी नेहा अकेली महिला उद्यमी थीं।

कोरोना में मिला बूस्ट, ऑनलाइन बना ब्रांड

कोरोना महामारी के दौरान नेहा ने TutorCabin को पूरी तरह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में बदल दिया। इसका फायदा यह हुआ कि देशभर से छात्र और शिक्षक इससे जुड़ने लगे। आज TutorCabin भारत के सबसे भरोसेमंद ऑनलाइन ट्यूशन प्लेटफॉर्म्स में से एक है।

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