
संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक को महिला विरोधी दलों द्वारा गिराए जाने के विरोध में रविवार को काशी में आक्रोशित महिलाओं ने ‘बेनकाब मार्च’ निकाला। महिला परिषद की ओर से आयोजित यह मार्च सुभाष मंदिर से मुंशी प्रेमचंद स्मृति द्वार, लमही तक निकाला गया। मार्च में शामिल महिलाओं के हाथों में पोस्टर थे, जिन पर लिखा था- महिला आरक्षण नहीं मिलेगा तो होगा रोटी-पानी बंद। महिलाओं ने अपने पतियों को चेतावनी दी कि यदि वे महिला विरोधी दलों से किसी भी प्रकार का संबंध रखेंगे तो घर में ‘किचन हड़ताल’ कर दी जाएगी।
महिलाएं इतनी आक्रोशित थीं कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पोस्टर फूंका और उनके इस्तीफे की मांग की। महिला परिषद का नेतृत्व कर रही बीएचयू की इतिहास विभाग की प्रोफेसर डॉ. मृदुला जायसवाल ने कहा कि कुछ बेशर्म नेताओं ने भरी संसद में महिलाओं का अपमान किया और हंसते रहे। याद रखें, इतिहास खुद को दोहराता है। एक बार भरी सभा में माता द्रोपदी का अपमान हुआ था, जिसके परिणामस्वरूप महाभारत हुआ और नारी द्रोहियों का समूल विनाश हुआ। अब फिर महाभारत होगा और इन नारी द्रोहियों को संसद व घर दोनों जगहों से भगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने अपने भाई और पिता होने का फर्ज निभाया है, लेकिन कुछ नारी द्रोहियों के कारण वे साधारण महिलाओं को सम्मान नहीं दिला पाए। मोदी जी, आप चिंता न करें। महिला आरक्षण के लिए हम सभी आपके साथ हैं। मरते दम तक आपके साथ रहेंगे, ताकि आप महिलाओं को सम्मान दिला सकें। जिन बेशर्मों ने मेज थपथपाई है, उन्हें हम ताली बजाने लायक भी नहीं छोड़ेंगे। विशाल भारत संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्चना भारतवंशी ने कहा कि भरी संसद में नारी शक्ति का अपमान करने वालों को कोई भी महिला कभी नहीं भूलेगी। हम अपमानित महसूस कर रही हैं। यह महिलाओं के सम्मान का विषय है, इससे कोई समझौता नहीं होगा।






