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सुस्त पड़ी उद्योगों की रफ्तार

नई दिल्ली

भारत के औद्योगिक सेक्टर की ग्रोथ पांच महीने में सबसे सुस्त दिख रही है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि ईरान और अमरीका युद्ध से जुड़े सेक्टर्स पर इसकी सबसे ज्यादा मार दिख रही है। आंकड़ों में दिख रहा है कि फैक्ट्री का उत्पादन घटने और ऊर्जा का उत्पादन कमजोर पडऩे की वजह से पूरे औद्योगिक सेक्टर पर ही बुरा असर दिखा है। इससे पहले इकोनॉमिस्ट के बीच हुए सर्वे में भी मार्च महीने में औद्योगिक उत्पादन के सुस्त रहने का अनुमान लगाया गया था। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में दिख रहा है कि मार्च में औद्योगिक उत्पादन 4.1 फीसदी रहा है, जो पांच महीने में सबसे कम है। उत्पादन में यह गिरावट बिजली उत्पादन में कमी और फैक्ट्रियों का आउटपुट कम होने की वजह से रहा है। उद्योगों पर यह असर ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध की वजह से दिख रहा है।

इससे पहले रॉयटर्स की ओर से इकोनॉमिस्ट के बीच कराए सर्वे में भी औद्योगिक उत्पादन 3.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। फरवरी में इसका रिवाइज अनुमान 5.1 फीसदी रहा है। पिछले साल अक्तूबर में यह सबसे कम 0.5 फीसदी रहा था। मार्च के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी में युद्ध शुरू होने के तत्काल बाद से ही इसका असर उद्योगों पर दिखने लगा है तो आने वाले समय में यह और भी ज्यादा असर डालेगा। आंकड़ों के अनुसार, मार्च में उपभोक्ता टिकाऊ सेक्टर जैसे कार और फोन उत्पादन की ग्रोथ रेट 5.3 फीसदी रही, जो एक महीने पहले फरवरी में 7.1 फीसदी थी. इसके अलावा नॉन ड्यूरेबल सेक्टर का आउटपुट मार्च में 1.1 फीसदी ग्रोथ दर्ज कर सका, जो एक महीने पहले यानी फरवरी में 0.5 फीसदी गिरा था। कैपिटल गुड्स सेक्टर ने भी मार्च में 14.6 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की, जो फरवरी में सिर्फ 12.4 फीसदी ग्रोथ ही बना सका था।

यहां सबसे ज्यादा असर

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि मार्च में मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट महज 4.3 फीसदी ही बढ़ा है, जो एक महीने पहले फरवरी में 5.9 फीसदी की दर से बढ़ा था। सबसे ज्यादा असर युद्ध से जुड़े ऊर्जा सेक्टर पर पड़ा है, जिसकी ग्रोथ रेट मार्च में 0.8 फीसदी रही, जो फरवरी में 2.3 फीसदी के आसपास थी। खनन क्षेत्र में का उत्पादन ग्रोथ भी मार्च में सिर्फ 5.5 फीसदी दिखा है, जो एक महीने पहले तक 3.1 फीसदी रहा था।

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