आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है, यूएन से भारत ने पूरी दुनिया चेताई, दोहरे रवैये पर जमकर लताड़ा

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक बार फिर बेहद कड़ा संदेश दिया है। यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने साफ शब्दों में कहा है कि ‘एक आतंकवादी, आतंकवादी ही होता है’ और किसी भी परिस्थिति में इसे सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यूनाइटेड नेशंस की ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी की नौवीं समीक्षा के दौरान आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने पर जोर दिया है। हरीश ने कहा कि हमें इस खूनी विचारधारा को जड़ से खत्म करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और आतंक को सही ठहराने के लिए कोई शिकायत या बहाना नहीं खोजना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है।
भारत ने आतंकवाद की कीमत अपनी जान गंवाकर, परिवारों को उजाडक़र और समाज को तबाह करके चुकाई है। इसी अनुभव के आधार पर भारत का साफ मानना है कि किसी भी राजनीतिक कारण या रणनीतिक हिसाब-किताब को दरकिनार करते हुए, आतंक के हर रूप की कड़ी निंदा होनी चाहिए। भारतीय दूत ने आतंकवाद से निपटने में दुनिया के दोहरे मापदंडों को खारिज करने की मांग की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकियों, उनके आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को हर हाल में जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स के मानकों को सख्ती से लागू करने और वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया, ताकि कोई भी जगह टेरर फंडिंग का सुरक्षित ठिकाना न बन सके।
नई तकनीक के दुरुपयोग पर गहरी चिंता जताई
हरीश ने आतंकी संगठनों द्वारा नई और उभरती हुई तकनीकों के बढ़ते दुरुपयोग पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आतंकी समूह अब एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन, ऑटोनॉमस हथियार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक, वर्चुअल एसेट, डार्क वेब और ऑनलाइन कट्टरपंथ फैलाने वाले प्लेटफॉर्म का फायदा उठा रहे हैं।
कहीं भी पनपने वाला आतंक शांति के लिए खतरा
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के केंद्र में आतंकवाद के पीडि़तों को रखा जाना चाहिए, जिन्हें अकसर बहुपक्षीय चर्चाओं में नजरअंदाज कर दिया जाता है। पीडि़तों को वह सम्मान और पुनर्वास मिलना चाहिए जिसके वे हकदार हैं। अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कहीं भी पनपने वाला आतंक, हर जगह की शांति के लिए खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया आतंकवाद पर किसी भी तरह के भ्रम की स्थिति को बर्दाश्त नहीं कर सकती और भविष्य की पीढिय़ां सुरक्षा की हकदार हैं।






