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चंद्रमा तक पहुंचने का एक और टेस्ट पास, नए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का हॉट टेस्ट सफल

नई दिल्ली

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इतिहास रच दिया है। इसरो ने शनिवार को चंद्रमा तक पहुंचने का एक और टेस्ट पास कर लिया। तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट पूरा किया गया। इस टेस्ट को 175 टन के बेहद ऊंचे थ्रस्ट लेवल पर अंजाम दिया गया है। यह इस सीरीज का आठवां सफल टेस्ट था। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य इंजन के प्री-बर्नर इग्निशन के बाद की क्षमता को जांचना था। इसरो ने इस बार 88 प्रतिशत की क्षमता पर इंजन को चलाकर अपनी स्वदेशी तकनीक का लोहा मनवाया है। इस महाटेस्ट की सफलता के बाद अब भारत अपने सबसे भारी रॉकेट एलवीएम3 को और ज्यादा शक्तिशाली बनाने के करीब पहुंच गया है। इस टेस्ट से वैज्ञानिकों को 200 टन के फुल थ्रस्ट लेवल को हासिल करने का पूरा भरोसा मिल गया है।

इसरो का यह नया सेमी-क्रायोजेनिक इंजन पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। पावर हैड टेस्ट आर्टिकल में थ्रस्ट चैंबर को छोडक़र इंजन के सभी सिस्टम शामिल होते हैं। टेस्ट के दौरान मुख्य टर्बोपंप ने 400 और 500 बार का आउटलेट प्रेशर सफलतापूर्वक जनरेट किया। इससे पहले के टेस्ट केवल 47 प्रतिशत और 60 प्रतिशत की क्षमता पर किए गए थे। पहली बार इसे 175 टन के थ्रस्ट लेवल पर परखा गया है। इस इंजन का इस्तेमाल सेमी-क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज में किया जाएगा। यह नया सिस्टम एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के मौजूदा एल110 कोर स्टेज की जगह लेगा। इससे रॉकेट की पेलोड क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी।

अब इंजन टेस्ट की बारी

नई दिल्ली। भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियां अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। इसरा) के चेयरमैन वी. नारायणन ने कहा कि मिशन से जुड़े कई अहम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं और अब एजेंसी इंजन टेस्ट की तैयारी में जुटी है। उन्होंने संकेत दिया कि पहली मानवरहित उड़ान की तारीख का ऐलान भी जल्द किया जाएगा। वी. नारायणन ने बताया कि हाल ही में एक महत्त्वपूर्ण परीक्षण किया गया, जिसमें थ्रस्ट चेंबर को छोडक़र करीब 90 प्रतिशत थ्रस्ट लोड हासिल किया गया।

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