आर्थिक

कच्चे तेल के आयात के लिए सिर्फ 6 देशों पर निर्भरता जोखिम भरा, CEEW ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल के आयात में सिर्फ छह देशों पर भारत की अत्यधिक निर्भरता देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है। CEEW की बुधवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत कच्चे तेल का 85 प्रतिशत से अधिक आयात केवल छह देशों से करता है, जिनमें रूस और पांच पश्चिम एशियाई देश शामिल हैं। यह आपूर्ति में कोई रुकावट आने पर, जैसा की इस समय परिस्थिति बनी है, लचीलेपन को सीमित कर रहा है। इसमें बताया गया है कि सिर्फ आयात पर निर्भरता ही नहीं, रिफाइनरियों की बनावट के कारण भी जोखिम है, क्योंकि देश केवल कुछ विशेष श्रेणी के कच्चे तेल का ही कम खर्च में शोधन करने की क्षमता रखता है।

अध्ययन में लंबी अवधि में कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने और ब्राजील, गुयाना तथा पश्चिम अफ्रीका जैसे आपूर्तिकर्ताओं को शामिल करने की सलाह दी गयी है। साथ ही, रिफाइनरियों के आधुनिकीकरण और रिफाइनरी में बदलाव लाने के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाने का सुझाव दिया गया है। ‘भारत का ऊर्जा भविष्य कितना सुरक्षित? पहुंच, विश्वसनीयता और क्रय शक्ति’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्तिकर्ताओं की सीमित संख्या, जोखिम भरे समुद्री मार्ग, सीमित रिजर्व और भंडारण क्षमता, रिफाइनरी से जुड़ी बाधाएं और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करते हैं।

साल 2024 में देश ने अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 48 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 26 प्रतिशत कोयला आयात किया था। वित्त वर्ष 2024-25 में देश के कुल आयात बिल में जीवाश्म ईंधन का हिस्सा 28 प्रतिशत से अधिक था। वैश्विक स्तर पर तेल आयात में भारत का हिस्सा 8.6 प्रतिशत, रसोई गैस के व्यापार में लगभग चार प्रतिशत और कोयला आयात में लगभग 15 प्रतिशत है।

सीईईडब्ल्यू के फेलो हेमंत मल्या ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों विविधता के सरकार के प्रयासों के बावजूद ऊर्जा सुरक्षा के जोखिम और अधिक जटिल होते जा रहे हैं। कच्चे तेल, तरल प्राकृतिक गैस, रसोई गैस, कोयले के आयात के प्रमुख समुद्री मार्गों में आने वाली रुकावटों का असर रसोई की लागत, परिवहन खर्च, उर्वरक सब्सिडी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और महंगाई को तुरंत प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि गैस सिस्टम के उपयोग को अधिकतम स्तर तक ले जाने, रिफाइनरी को और अधिक विस्तार देने से परहेज करने, व्यावहारिक इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने में तेजी लाने, उद्योगों के विद्युतीकरण, पेट्रोल की कम मांग के अनुरूप रिफाइनरियों को नये सिरे से तैयार करने और मजबूत हरित प्रौद्योगिकी पर आधारित आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करने की जरूरत है।

अध्ययन में देश का तेल रिजर्व कम होने पर भी चिंता जताई दई है। कच्चे तेल का मात्र नौ-दस दिन का रणनीतिक रिजर्व है, जबकि गैस का कोई रणनीतिक रिजर्व नहीं है। इसके अलावा रिफाइनरी के परिचालन स्टॉक में 64 दिनों का कवर उपलब्ध है, जो जापान (लगभग 200 दिन) और दक्षिण कोरिया (लगभग 207 दिन) जैसी आयात पर निर्भर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है।

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