राज्यसभा के लिए नामित हुए हर्षवर्धन श्रृंगला, PM मोदी ने दी बधाई — कूटनीतिक अनुभव को बताया “राष्ट्रीय पूंजी”
नई दिल्ली | 13 जुलाई 2025: पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक हर्षवर्धन श्रृंगला को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किए जाने पर PM नरेंद्र मोदी ने रविवार को बधाई दी और उनके असाधारण कूटनीतिक अनुभव की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रृंगला का “अद्वितीय दृष्टिकोण” उच्च सदन की कार्यवाही को समृद्ध करेगा।
यह नामांकन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) के खंड (3) के अंतर्गत किया गया है, जिसमें चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को उच्च सदन के लिए मनोनीत किया गया है। ये नियुक्तियां पूर्व मनोनीत सदस्यों के सेवानिवृत्त होने से उत्पन्न रिक्तियों को भरने के लिए की गई हैं।
PM मोदी का प्रशंसा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा:
“हर्षवर्धन श्रृंगला एक राजनयिक, बुद्धिजीवी और रणनीतिक विचारक के रूप में उत्कृष्ट रहे हैं। उन्होंने भारत की विदेश नीति और G20 अध्यक्षता में अमूल्य योगदान दिया है। मुझे खुशी है कि उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया गया है। उनके अनुभव से संसद को लाभ मिलेगा।”
हर्षवर्धन श्रृंगला ने भी ‘X’ पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा:
“मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति महोदय का आभारी हूँ। मैं सदैव देश की सेवा करना चाहता था, और सेवानिवृत्ति के बाद भी यह प्रयास जारी रखा है। मैं इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाऊँगा और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी मजबूत करने के लिए प्रयास करता रहूँगा।”
श्रृंगला ने अमेरिका और बांग्लादेश में भारत के राजदूत के रूप में सेवा दी है और जनवरी 2020 से अप्रैल 2022 तक वे विदेश सचिव भी रहे।
राज्यसभा के लिए नामित अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व:
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उज्ज्वल निकम – प्रसिद्ध लोक अभियोजक, जो 26/11 मुंबई हमलों जैसे मामलों में अपनी भूमिका के लिए चर्चित हैं।
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सी. सदानंदन मास्टर – केरल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद्, जिन्होंने दशकों तक जमीनी कार्य किए।
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मीनाक्षी जैन – प्रख्यात इतिहासकार, जिनका भारतीय इतिहास और सभ्यता के अध्ययन में अहम योगदान रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों नामित सदस्यों को भी व्यक्तिगत रूप से ‘X’ पर बधाई दी और उनकी सेवाओं की सराहना की।
राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व में विविधता का प्रतीक
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में इन नामांकनों को “कानून, कूटनीति, समाज सेवा और ऐतिहासिक अध्ययन में असाधारण योगदान” का प्रतीक बताया गया है। यह कदम भारतीय संसद में विविध विशेषज्ञताओं और अनुभवों को जोड़ने की दिशा में देखा जा रहा है।







