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उत्तराखंड में अब स्कूलों में गूंजेगा गीता का ज्ञान: धामी सरकार का बड़ा फैसला बना चर्चा का विषय

देहरादून, 16 जुलाई 2025 — उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य के स्कूली शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और बहुचर्चित कदम उठाया है। अब राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन के नैतिक मूल्यों और आत्म-अनुशासन की शिक्षा देती है।

सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार नहीं है, बल्कि छात्रों को भारतीय संस्कृति, दर्शन और नैतिक शिक्षा से जोड़ना है। सीएम धामी ने कहा, “गीता के श्लोक जीवन को दिशा देने वाले हैं। यह कदम छात्रों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाएगा।”

सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा आदेश

यह आदेश उत्तराखंड के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में लागू होगा। शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह जल्द ही इस फैसले से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश जारी करे। सरकार का मानना है कि यह पहल छात्रों के चरित्र निर्माण और भारतीय सभ्यता की गहरी समझ को बढ़ावा देगी।

हालांकि, इस कदम को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां एक वर्ग इसे सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला बता रहा है, वहीं कुछ लोग इसे धर्मनिरपेक्षता की भावना के खिलाफ मान रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पहल सभी धर्मों का सम्मान करते हुए केवल शैक्षणिक और नैतिक उद्देश्य से की गई है।


UCC लागू करने वाला पहला राज्य भी बना उत्तराखंड

गौरतलब है कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। 27 जनवरी 2025 से लागू हुई इस संहिता के तहत विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों पर एक समान कानून लागू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री धामी ने उसी दिन इसका आधिकारिक पोर्टल भी लॉन्च किया था।

UCC के तहत बहुविवाह पर रोक, एकतरफा तलाक की समाप्ति, और बेटियों को बेटों के बराबर संपत्ति में अधिकार जैसे प्रावधान शामिल हैं। यह कानून लिंग, धर्म और जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त कर सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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