हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने हांसी तहसीलदार पर की कार्रवाई, विवाह प्रमाण पत्र में देरी पर जुर्माना और मुआवज़ा
चंडीगढ़, 17 जुलाई — हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने विवाह प्रमाण पत्र जारी करने में चार माह की अनावश्यक देरी के मामले में हांसी के तहसीलदार और विवाह रजिस्ट्रार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने उन्हें 1,000 रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया और शिकायतकर्ता को 5,000 रुपये का मुआवज़ा देने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई सेवा के अधिकार अधिनियम की धारा 17(1)(ह) के तहत की गई है।
मामला 10 मार्च 2025 को हिसार निवासी द्वारा विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन देने से शुरू हुआ था। विवाह 28 नवम्बर 2023 को संपन्न हुआ था, और आवेदन विलंबित पंजीकरण श्रेणी में किया गया। विवाह रजिस्ट्रार ने जन्म प्रमाण पत्र की मांग की, जबकि हरियाणा सरकार के निर्देशों के अनुसार, फैमिली आईडी से ही आयु और पते का सत्यापन किया जा सकता था। इसके बावजूद दस्तावेज़ की मांग की गई, जिससे देरी हुई।
आयोग ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कहा कि विवाह पंजीकरण जैसी सेवा में चार माह की देरी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। 15 जुलाई को हुई सुनवाई में रजिस्ट्रार ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए प्रमाण पत्र तत्काल जारी करने का आश्वासन दिया।
आयोग ने उपायुक्त हिसार को आदेश दिए हैं कि जुलाई माह के वेतन से कुल 6,000 रुपये की कटौती की जाए, जिसमें 1,000 रुपये राज्य कोष में और 5,000 रुपये शिकायतकर्ता को दिए जाएं। इसके साथ ही, विवाह रजिस्ट्रारों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया है।






