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तीन मई 1913 को प्रदर्शित हुई थी पहली भारतीय फिल्म, बनाने में लगे थे 15 हजार रुपए

मुंबई। भारतीय सिनेमा जगत की पहली फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र तीन मई 1913 को को प्रदर्शित हुई थी। फिल्म राजा हरिश्चंद्र का निर्माण दादा साहब फाल्के मूल नाम धुंडिराज गोविन्द फाल्के ने फाल्के फिल्म कंपनी के बैनर तले किया। फिल्म बनाने में उनकी मदद फोटोग्राफी उपकरण के डीलर यशवंत नाडकर्णी ने की थी। फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ को बनाने में करीब 15 हजार रुपए लगे थे। उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी धनराशि थी। ऐसे में यदि फिल्म को केवल तीन या चार दिन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा तो वे अपना खर्च कैसे निकालेंगे? इस फिल्म को 21 अप्रैल, 1913 को ओलंपिया थिएटर में कुछ प्रमुख लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया था। उसके बाद कोरोनेशन थिएटर के मैनेजर नानासाहेब चित्रे ने फिल्म को प्रदर्शित करने की इच्छा जताई।

वर्ष 1911 में दादा साहेब अपने बेटे के साथ अमेरिका-इंडिया पिक्चर पैलेस में ‘अमेजिंग एनिमल्स’ नाम की फिल्म देखने पहुंचे थे। स्क्रीन पर जानवरों को देखकर फाल्के का बेटा अचंभित हो जाता है और घर आकर अपनी मां को सारी बातें बताता है।क्योंकि तब के दौर के लिए ये सब कुछ कल्पना जैसा था इसलिए बच्चे की बात पर कोई यकीन नहीं करता,इसलिए अगले दिन दादा साहेब पूरी फैमिली के साथ वहीं फिल्म देखने पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर एक ट्विस्ट आ जाता है और यही ट्विस्ट दादा साहेब फाल्के की पूरी जिंदगी बदल देता है। दरअसल होता ये है कि जिस दिन फाल्के फैमिली फिल्म देखने पहुंचती है, उस दिन ईस्टर था।

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