Emergency Helpline Number 112 : पूरे देश में होगा एक ही एमरजेंसी नंबर

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के अंदर एमरजेंसी में सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर ‘112’ चालूू करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रॉमा केयर के लिए हेल्पलाइन नंबर ‘112’ चालू करने के साथ-साथ नेक मददगारों के लिए शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बैंच ने सेव लाइफ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी आदेश में राज्यों से यह भी कहा है कि मासिक बैठक बुलाकर तब तक की अनुपालन रिपोर्ट जमा करें और संबंधित पोर्टल पर उससे जुड़े ब्योरे भी अपलोड करें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब एक व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होता है या इसी तरह की किसी और घटना का सामना करता है, तो ट्रॉमा या तत्काल मेडिकल केयर की जरूरत होती है। आमतौर पर वे सदमे में होते हैं और बेबस महसूस कर रहे होते हैं।
तब उन्हें यही उम्मीद होती है कि उनके आसपास मौजूद लोग उनकी सहायता के लिए आगे आएंगे और उन्हें जिस तरह की मेडिकल देखभाल की जरूरत है, वह दिलानें में पूरी मदद करेंगे। ऐसी स्थिति में मेडिकल सहायता या ट्रॉमा केयर के बिना गुजारा गया प्रत्येक मिनट बचने की संभावना कम कर देता है। तत्परता, सही मायने में दवा की तरह है। इन बाधाओं के समाधान के लिए जिस चीज की जरूरत है, वह है व्यवस्थित हस्तक्षेप, ट्रॉमा केयर के लिए यूनिफॉर्म फ्रेमवर्क तैयार करना, जन जागरूकता का निर्माण, प्राथमिक चिकित्सा कौशल का मानकीकरण और उचित नेक मददगार (गुड समैरिटन) कानून, क्योंकि नागरिकों के लिए ट्रॉमा केयर का अधिकार, भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिला जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है।






