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Sawan First Somwar 2025: कल है सावन का पहला सोमवार, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें

Sawan First Somwar 2025: 14 जुलाई 2025 को सावन का पहला सोमवार है, और पूरे देश में शिवभक्त इस पवित्र दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धा से शिवलिंग पर जल अर्पित करने मात्र से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य का आशीर्वाद देते हैं।

सावन सोमवार 2025: शुभ मुहूर्त

पूरे दिन शिव पूजा की जा सकती है, लेकिन विशेष रूप से जलाभिषेक और पूजन के लिए निम्नलिखित मुहूर्त श्रेष्ठ माने गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:15 से 5:00 बजे तक

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:50 बजे तक

  • प्रदोष काल: शाम 7:15 से रात 8:45 बजे तक

पूजा विधि: कैसे करें सावन सोमवार को शिव पूजन?

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

  2. मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित कर पूजन करें।

  3. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।

  4. शिवलिंग पर सबसे पहले जल अर्पित करें।

  5. फिर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।

  6. बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, भस्म और भांग अर्पित करें।

  7. सफेद मिठाई का भोग लगाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

  8. अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें।

सावन सोमवार व्रत नियम: व्रत कितने घंटे का होता है?

  • व्रत सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक चलता है।

  • कुछ भक्त निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कई फलाहार या सात्विक भोजन लेते हैं।

  • व्रत का पारण (समापन) अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद किया जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

क्या करें:
✅ बेलपत्र, गंगाजल, शहद, दूध, दही, गन्ने का रस चढ़ाएं।
✅ शिव मंत्रों का जाप करें।
✅ शांत और सात्विक दिन बिताएं।

क्या न करें:
❌ शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी और सिंदूर न चढ़ाएं।
❌ मांस, मछली, अंडा और तामसिक भोजन न करें।
❌ क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से बचें।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय बोलें ये मंत्र

  • ॐ नमः शिवाय

  • ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः

  • ॐ शर्वाय नमः

  • ॐ भैरवाय नमः

  • ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय
    (अन्य मंत्र ऊपर सूचीबद्ध हैं)


व्रत खोलने के लिए क्या खाएं?

व्रत खोलने के लिए आप खा सकते हैं:

  • साबूदाने की खिचड़ी

  • फल या सूखे मेवे

  • खीर या हल्का सात्विक भोजन

यदि आपने निर्जल व्रत रखा है, तो व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद करना श्रेष्ठ माना गया है।


आस्था और भक्ति का पर्व है सावन

सावन के सोमवार सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि, संयम और समर्पण का प्रतीक हैं। इस पावन अवसर पर शिवभक्त व्रत, पूजा, भजन-कीर्तन और सेवा से भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।


नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। किसी भी विशेष पूजा विधि या नियम के लिए अपने पुरोहित या धर्मगुरु से परामर्श अवश्य लें।

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