सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मासिक धर्म स्वास्थ्य बना मौलिक अधिकार

Menstrual Health Fundamental Right India : भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाते हुए मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Health & Hygiene) को संविधान के तहत मौलिक अधिकार घोषित कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और निजता से जुड़ा विषय है और इसकी अनदेखी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मासिक धर्म कोई सामाजिक वर्जना या शर्म का विषय नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, जिसे सम्मान और संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए।
मासिक धर्म स्वास्थ्य = मौलिक अधिकार
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले ‘जीवन के अधिकार’ और ‘निजता के अधिकार’ का अभिन्न हिस्सा है। अदालत के अनुसार, जब तक महिलाओं और किशोरियों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुलभ मासिक धर्म सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई जाएँगी, तब तक समानता और गरिमा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। पढ़ें पूरी खबर …






