8वीं पास किसान ने ₹50,000 से शुरू की मशरूम फार्मिंग, आज सालाना कमा रहे ₹7 करोड़ – जानिए सफलता की कहानी

कुरुक्षेत्र, हरियाणा : मेहनत, लगन और नवाचार अगर सही दिशा में किया जाए तो बड़ी से बड़ी सफलता पाई जा सकती है। ऐसा ही कर दिखाया है हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के गांव तल्हेरी के रहने वाले 8वीं पास किसान यादविंदर सिंह ने। जिन्होंने सिर्फ ₹50,000 से मशरूम फार्मिंग शुरू की थी, और आज उनका वार्षिक टर्नओवर साढ़े 7 करोड़ रुपये से अधिक है।
₹50,000 से शुरू की मशरूम खेती
यादविंदर सिंह ने साल 2014 में अपने बंद पड़े पोल्ट्री फार्म में ₹50,000 का निवेश कर मशरूम की खेती शुरू की थी। कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में नई दिशा दिखाई। शुरुआती दिनों में यह खेती उन्होंने नौकरी के साथ की, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें करोड़ों का मालिक बना दिया।
₹3200 महीने की नौकरी से शुरुआत
यादविंदर ने बताया कि साल 2008 में उन्होंने अपने ही गांव में एक मशरूम फार्म पर ₹3200 प्रति माह की तनख्वाह पर काम शुरू किया था। वहां काम करते-करते उन्होंने मशरूम की खेती की बारीकियां सीख लीं और धीरे-धीरे सुपरवाइजर बन गए। इसके बाद उन्होंने सोचा कि अब खुद का कुछ करना चाहिए — और यही से उनकी सफलता की असली कहानी शुरू हुई।
2016 में छोड़ी नौकरी, बढ़ाया अपना कारोबार
2014 में छोटे स्तर से शुरुआत करने के बाद यादविंदर ने 2016 में नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह अपने फार्म पर ध्यान केंद्रित किया।धीरे-धीरे उन्होंने मशरूम फार्मिंग को व्यावसायिक रूप दिया और आज उनका व्यवसाय करोड़ों में पहुंच चुका है।
विदेश जाने का सपना टूटा, लेकिन सफलता भारत में मिली
यादविंदर ने बताया कि 2006 में वे विदेश (कोरिया) डोंकी रूट से जाने की कोशिश में थे, लेकिन रास्ते में दिक्कतें आने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा। आज वे गर्व से कहते हैं – अगर मैं विदेश चला जाता तो शायद कभी इतना नहीं कमा पाता। देश में रहकर मेहनत की, तो सफलता खुद चलकर मेरे पास आई।
15 एकड़ में मशरूम की खेती
आज यादविंदर का मशरूम फार्म करीब 15 एकड़ में फैला हुआ है।
-
3 एकड़ में कंपोस्ट प्लांट बना है,
-
जबकि 12 एकड़ में मशरूम उत्पादन किया जाता है।
हर शेड पर करीब ₹2.5 लाख का खर्च आता है और एक शेड से ₹1 से ₹2 लाख तक की कमाई हो जाती है।
अमेरिका से मंगवाया मशरूम कल्चर
उन्होंने मशरूम की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अमेरिका (USA) से बीज तैयार करने वाला कल्चर मंगवाया है। अब वे खुद उच्च गुणवत्ता का मशरूम बीज तैयार कर रहे हैं और उनका कंपोस्ट उत्पादन रोजाना करीब 3 टन है, जो आसपास के किसानों तक पहुंचता है।
दिल्ली, पंजाब, यूपी और जम्मू-कश्मीर तक सप्लाई
आज यादविंदर का तैयार मशरूम दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक सप्लाई होता है। शुरुआत में बिक्री में दिक्कत आई, लेकिन अब उनके पास दूसरे राज्यों से एडवांस ऑर्डर आते हैं।
ढाई सौ परिवारों को दिया रोजगार
आज यादविंदर के फार्म पर 250 से ज्यादा लोग काम करते हैं, जिनमें 150 महिलाएं शामिल हैं। उनके पुराने सहयोगी सचिन राणा कहते हैं –यादविंदर जी ने अपनी मेहनत से न सिर्फ खुद को स्थापित किया, बल्कि सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी का सहारा बने।
यादविंदर की सफलता का संदेश
यादविंदर कहते हैं –अगर इंसान मेहनत करे, तो भगवान भी उसका साथ देता है। मैंने ₹3200 की नौकरी से शुरुआत की थी, आज करोड़ों का टर्नओवर है। बस मेहनत और धैर्य जरूरी है।






