पाकिस्तान जा रहा पानी रोकें, विधानसभा में बोले कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क

पंजाब विधानसभा के सत्र के दौरान हलका भोआ से विधायक और कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने अपने सीमावर्ती क्षेत्र, जिला पठानकोट और माझे के किसानों से जुड़े अहम नहरी पानी के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। विधानसभा में बोलते हुए मंत्री कटारूचक्क ने कहा, कि पाकिस्तान की ओर बेकार जा रहे पानी को रोक कर पंजाब के खेतों तक पहुंचाना समय की मुख्य जरूरत है। मंत्री कटारूचक्क ने बताया कि माधोपुर हेडवक्र्स से नीचे जम्मू कश्मीर की सीमा से लगते क्षेत्रों में से जलालियां, संगारवां, तरनाह नाला और उज्ज दरिया जैसे बरसाती नालों का लगभग 500 से 600 क्यूसिक पानी बिना इस्तेमाल के पाकिस्तान चला जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा उज्ज दरिया पर बनाए जा रहे उज्ज प्रोजेक्ट के पानी को रावी दरिया में डायवर्ट करने की वकालत की। उन्होंने कहा, कि अगर यह पानी रावी के रास्ते थीन डैम -माधोपुर की तरफ लाया जाए तो इससे पंजाब में पानी की कमी को बड़े स्तर पर पूरा किया जा सकता है।
मंत्री ने मकोड़ा पत्तन पर रावी ब्यास लिंक नहर के प्रस्ताव का पूरी तरह समर्थन करते हुए कहा, कि अगर यह नहर बनती है तो इससे माझा क्षेत्र के गुरदासपुर, कलानौर, दीनानगर, तरनतारन और अमृतसर के इलाकों को शानदार नहरी पानी मिलेगा, जिससे खेतीबाड़ी क्षेत्र को बड़ा सहारा मिलेगा। अपने गृह जिले पठानकोट का विशेष जिक्र करते हुए लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि पठानकोट जिला सूबे का मुख्य ‘लीची जोन’ है, जहां लगभग 5,500 एकड़ में लीची के बाग हैं और पंजाब की 69 प्रतिशत लीची का उत्पादन यहीं से होता है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जब गेहूं की कटाई का सीजन होता हैए उसी समय लीची के बागों को पानी की सख्त जरूरत होती है। गेहूं को आग लगने के डर से दिन के समय बिजली देने में दिक्कतें आती हैं। अगर इन नालों के पानी को चैनलाइज कर लिया जाए तो लीची बागवानों को भरपूर पानी मिलेगा और गेहूं को आग लगने के खतरे से भी निजात मिलेगी। उन्होंने कहा, कि पंजाब देश का अन्नदाता है और धान व अन्य फसलों के माध्यम से केंद्रीय पूल में बड़ा योगदान देता है। ऐसे में सूबे के नहरी पानी के प्रबंधन को मजबूत करना और अतिरिक्त पानी को सही ढंग से चैनलाइज करना पंजाब के किसानों और उद्योगों दोनों के लिए सोने पर सुहागा साबित होगा।





