सीमापार आने-जाने का मतलब आतंक नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेशी नागरिक को दी जमानत

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को भारत में प्रवेश दिलाने के आरोप में शामिल एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। जस्टिस बागची ने कहा कि किसी मामले में यह संकेत मिल सकता है कि सीमा पार आवाजाही अवैध गतिविधियों के लिए है, लेकिन केवल सीमा पार आवाजाही होने से यह दावा नहीं किया जा सकता कि यह किसी आतंकी समूह से जुड़ी है।
उन्होंने कहा कि आरोपी 10 साल से अधिक समय से बंगलुरु में रह रहा है। जांच में किसी आतंकवादी समूह से संबंध होने का कोई संकेत नहीं मिला है। बता दें कि याचिकाकर्ता पर आरोप है कि वह एक बांग्लादेशी नागरिक है, जो बांग्लादेश और म्यांमार से भारत में मानव तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा है। उसे सात नवंबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम आरोपी की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाएंगे, लेकिन जमानत देंगे। आरोपी के सह-आरोपी ने भी जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और उसे मई 2025 में जमानत मिल गई थी, लेकिन दोनों मामले अलग बताए जा रहे हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता का भारत में स्थायी निवास नहीं है, इसलिए उसे कड़ी शर्तों के साथ जमानत पर रिहा किया जा सकता है।






