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केयू में 100 से अधिक वृक्षों की पहचान अब क्यूआर कोड से, डिजिटल बोटैनिकल लर्निंग की अनूठी पहल

कुरुक्षेत्र, 6 जुलाई। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में बॉटनी विभाग एवं हार्टिकल्चर विभाग ने डिजिटल शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए विश्वविद्यालय परिसर में 100 से अधिक वृक्षों एवं महत्वपूर्ण पौधों की पहचान को क्यूआर कोड तकनीक से जोड़ दिया है। इस परियोजना का सफल क्रियान्वयन शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान एमएससी. अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों सार्थक गर्ग, अभिनव अंगरिश एवं दीपांशु ने बॉटनी विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश तथा हॉर्टिकल्चर विभाग के प्रो. नरेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में किया।
इन क्यूआर कोड युक्त नामपट्टिकाओं का औपचारिक उद्घाटन कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के नवाचारपूर्ण कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की पहल शिक्षा, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे विद्यार्थियों में नवाचार की भावना को प्रोत्साहन मिलेगा और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा प्राप्त होगी।
इस परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के 100 से अधिक वृक्षों एवं महत्वपूर्ण पौधों पर क्यूआर कोड युक्त नामपट्टिकाएं स्थापित की गई हैं। अब कोई भी विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक या आगंतुक अपने मोबाइल फोन से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर संबंधित पौधे की विस्तृत जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकता है। इसमें पौधे का वैज्ञानिक नाम, सामान्य नाम, कुल (फैमिली), वर्गीकरण, वनस्पति विशेषताएं, औषधीय एवं आर्थिक उपयोग, पारिस्थितिक महत्व तथा अन्य वैज्ञानिक जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आधुनिक डिजिटल तकनीक को वनस्पति शिक्षा से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय परिसर की समृद्ध जैव विविधता को अधिक सुलभ, वैज्ञानिक और शिक्षणोपयोगी बनाना है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल लर्निंग तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बाटनी विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश तथा हॉर्टिकल्चर विभाग के प्रो. नरेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों सार्थक गर्ग, अभिनव अंगरिश और दीपांशु के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह परियोजना परिसर में शिक्षण, अधिगम, शोध, जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता के लिए नए अवसर प्रदान करेगी। साथ ही यह आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आगंतुकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल संसाधन के रूप में कार्य करेगी।

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