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राहुल गांधी की नागरिकता केस सुनने से हाई कोर्ट जज का इनकार

कांग्रेस नेता एवं रायबरेली सांसद राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता मामले में न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है। साथ ही सुनवाई के लिए नए बेंच को नॉमिनेट करने के लिए फाइल को मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष भेजने के निर्देश दिए हैं। याची एस.विग्नेश शिशिर द्वारा सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है। याचिकाकर्ता ने पोस्ट किया था कि यदि आपने किसी से पैसा लिया है तो उसे वापस कर दें, अन्यथा आपको जेल जाना होगा। हालांकि उसने अपने पोस्ट में जज का जिक्र नहीं किया था। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने हाल ही में दोहरी नागरिकता मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था। शनिवार को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश में न्यायालय ने कहा कि शुक्रवार को सुनवाई के दौरान याची समेत केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्ताओं से पूछा गया था कि क्या इस मामले में विपक्षी संख्या एक (राहुल गांधी) को नोटिस जारी किए जाने की जरूरत है।

अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि नोटिस जारी किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके बाद ओपन कोर्ट में एफआईआर दर्ज करने का विस्तृत आदेश पारित कर दिया गया। हालांकि, अपने उक्त आदेश के टाइप होने और उस पर हस्ताक्षर होने के पहले ही न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने पाया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ ने वर्ष 2014 में पारित एक निर्णय में कहा है कि एफआईआर दर्ज किए जाने के मांग वाले प्रार्थना पत्रों के खारिज होने पर पुनरीक्षण याचिका ही पोषणीय है और ऐसी याचिका पर प्रस्तावित अभियुक्त को नोटिस भेजा जाना अनिवार्य है। न्यायालय ने कहा कि इस विधिक स्थिति में विपक्षी संख्या एक (राहुल गांधी) को नोटिस जारी किए मामले को निर्णित करना उचित नहीं है।

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