फ्रांस में 1000 लोगों की मौत; ब्रिटेन, जर्मनी यूरोप में भी गर्मी से हाहाकार
नई दिल्ली
यूरोप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस में भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच हुईं। अतिरिक्त मौतों का मतलब है कि पिछले कुछ साल में हुई औसत मौतों की तुलना में इस बार करीब 1000 लोग ज्यादा मरे हैं। हालांकि सरकार ने न ही पिछली बार और न ही इस बार का कोई सटीक आंकड़ा दिया है। वहीं, दिल्ली में हीट इंडेक्स 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा गया है, जबकि असली तापमान सिर्फ 41.3 डिग्री था। यह फर्क हवा में मौजूद नमी की वजह से है। वहीं, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, डेनमार्क, चेक रिपब्लिक, इटली और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रविवार को यूरोप के 16 देशों में करीब 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कहीं सडक़ें पिघल रही हैं, कहीं स्कूल बंद करने पड़े हैं, तो कहीं जंगलों में भीषण आग भडक़ उठी है। ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। ब्रिटेन में जून के महीने का 50 साल पुराना पिछला रिकॉर्ड इस हफ्ते लगातार तीन दिन टूटा है।
दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस जून का नया रिकॉर्ड है। ब्रिटेन के इतिहास का सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस है, जो जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि यह इस साल टूट सकता है। अत्यधिक गर्मी के कारण पैदा हुए स्वास्थ्य संकट को देखते हुए पोलैंड, फ्रांस और इटली जैसे देशों में रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि रेल पटरियों और सडक़ों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जर्मनी में ट्रेन सेवाएं आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं. बर्लिन में पारा 39 डिग्री सेल्सियस तक चढ़ जाने पर स्थानीय पुलिस सडक़ों पर लोगों को राहत देने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछारों) का इस्तेमाल कर रही है.। धर, वैज्ञानिकों ने इस दमघोंटू लू का मुख्य कारण मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन को बताते हुए आगाह किया है कि इसके चलते रात का तापमान दो दशक पहले की तुलना में 100 गुना अधिक गर्म होने की संभावना बढ़ गई है।





